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प्यासा शहर: दावों के ‘बोर’ में दबी जनता, 15 मार्च के बाद फिर गलेगा हलक; दो दिन में एक बार मिलेगा पानी

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खबरवाणी

प्यासा शहर: दावों के ‘बोर’ में दबी जनता, 15 मार्च के बाद फिर गलेगा हलक; दो दिन में एक बार मिलेगा पानी

नगर पालिका की बैठक में कागजी घोड़े: चिकना नाला और लालावाड़ी के नाम पर सालों से सिर्फ आश्वासन, धरातल पर संकट भारी

आमला शहर में जल संकट की आहट नहीं, बल्कि दस्तक हो चुकी है। नगर पालिका परिसर में हुई परिषद की आपात बैठक में जो निर्णय लिए गए, वे राहत कम और आगामी मुश्किलों का संकेत ज्यादा दे रहे हैं। प्रशासन ने मान लिया है कि वर्तमान व्यवस्था 15 मार्च के बाद ढह जाएगी और शहरवासियों को फिर से दो दिन के अंतराल में पानी की आपूर्ति की जाएगी। यानी होली के आसपास शहर की प्यास राजनीति और तकनीकी खामियों के बीच और गहराएगी।
बैठक की 3 बड़ी नकारात्मक बातें

15 मार्च के बाद हाहाकार: नपा ने स्पष्ट कर दिया है कि एक दिन छोड़कर मिल रहा पानी अब ‘लग्जरी’ हो जाएगा। 15 मार्च से नल दो दिन में एक बार ही टपकेंगे।
चिकना नाला राजनीति का शिकार 2017 में भूख हड़ताल हुई, कई चुनाव बीत गए, भाजपा-कांग्रेस ने खूब रोटियां सेंकी, लेकिन चिकना नाला आज भी उपेक्षित है। बैठक में फिर से वही पुराना ‘सहमति’ का राग अलापा गया, जबकि हकीकत में सालों से यहाँ एक ईंट तक नहीं रखी गई।
सिर्फ बोर के भरोसे: परिषद ने 15 नए बोर खनन का निर्णय लिया है, लेकिन गिरते जलस्तर के बीच क्या ये बोर सिर्फ कागजों पर पानी उगलेंगे? पुरानी जर्जर पाइपलाइनों के कारण होने वाला लीकेज सिस्टम की पोल खोल रहा है।

लालावाड़ी का गहरीकरण: अब जागी कुंभकर्णी नींद

जब गर्मी सिर पर आ गई है, तब लालावाड़ी जलाशय के गहरीकरण का प्रस्ताव लाया गया है। सवाल यह है कि यह काम बारिश से पहले या ठंड में क्यों नहीं किया गया? अब जब पानी की सबसे ज्यादा जरूरत है, तब खुदाई की बात करना केवल बजट खपाने की कवायद नजर आती है।
इन सवालों के जवाब नहीं मिले:
चिकना नाला के विस्तारीकरण के लिए ‘कूप निर्माण’ की अनुमति अब तक क्यों नहीं ली गई?
जर्जर पाइपलाइनों को बदलने का काम गर्मी शुरू होने से पहले क्यों पूरा नहीं हुआ?
करोड़ों की जल आवर्धन योजना के बावजूद जनता दो दिन के अंतराल पर पानी लेने को मजबूर क्यों है?
निष्कर्ष: बैठक में अध्यक्ष और पार्षद मौजूद तो रहे, लेकिन निर्णयों में भविष्य की कोई ठोस कार्ययोजना के बजाय सिर्फ ‘इमरजेंसी पैचवर्क’ दिखाई दिया। शहर के चिकना नाला की उपेक्षा यह बताने के लिए काफी है कि जिम्मेदार लोग जनता की प्यास से ज्यादा फाइलों में दिलचस्पी ले रहे हैं।

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