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गंज, कोठीबाजार, कालापाठा, गाड़ाघाट, टिकारी लिंक रोड, जेएच कॉलेज की सडक़ों पर गड्ढे ही गड्ढे

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गंज, कोठीबाजार, कालापाठा, गाड़ाघाट, टिकारी लिंक रोड, जेएच कॉलेज की सडक़ों पर गड्ढे ही गड्ढे

गड्ढे अच्छे हैं’

सांध्य दैनिक खबरवाणी, बैतूल

नगर की सडक़ों की जिम्मेदारी नगरपालिका परिषद और लोक निर्माण विभाग के पास होती है। जब भी वरिष्ठ और जिम्मेदार अफसरों से सडक़ों को लेकर सवाल पूछे जाते हैं तो उनका एक ही जवाब होता है कि क्या समस्या है यह दिखवाते हैं, अथवा दूसरा रटा रटाया जवाब होता है कि सुधार कार्य करवाया जा रहा है, पर मुख्य सवाल यह उठता है कि जो भी सडक़ें इन दोनों विभागों द्वारा अलग-अलग ठेकेदारों से बनाई जाती है उसकी निविदा में सबसे मुख्य शर्त होती है उसकी गुणवत्ता और तीन या पांच वर्षों का रखरखाव।
पर दोनों ही विभाग न तो गुणवत्ता पर ध्यान देते हैं और न ही समयावधि के अंदर निविदाकर्ता द्वारा उसका उचित रखरखाव किए जाने पर जबकि इस रख रखाव की जिम्मेदारी हर निविदा में निश्चित समयावधि के लिए ठेकेदार की होती है। पिछले वर्ष ही गंज मस्जिद से कॉलेज की तरफ जाने वाली सडक़ को टू-लेन करने के साथ ही बीच में डिवाइडर और खूबसूरत स्ट्रीट लाइट लगाई गई थी, तब ऐसा महसूस हो रहा था कि यह सडक़ नगर की सबसे साफ और ख्ूाबसूरत सडक़ है। पर अभी एक वर्ष भी पूर्ण नहीं हुआ है और इस सडक़ का क्या हाल है वह लोगों से छुुपा नहीं है। नियमानुसार जो सडक़ें नगरपालिका के अधीन आती हैं और जो सडक़ें लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत आती हैं इनके रखरखाव की जिम्मेदारी भी विभाग की होती है और यदि सडक़ नई बनी हो तब भी निविदा की शर्तों के अंतर्गत ठेकेदार को बाध्य कर सडक़ों का रखरखाव करवाना इन दोनों विभागों के मुखिया की होती है और ये दोनों ही विभाग निविदा की शर्तों को दरकिनार कर बार-बार रखरखाव के नाम पर अलग से निविदा निकालकर फिर रखरखाव करवाते हैं और रखरखाव की गुणवत्ता भी इतनी खराब होती है कि जिस महीने में रखरखाव होता है उसी महीने में सडक़ों की स्थिति पहले जैसी हो जाती है। इसे यदि बड़े संदर्भ में देखें तो बैतूल-नागपुर हाईवे जो कि वर्ष 2015 में बनकर तैयार हुआ था और लगभग 10 वर्षों बाद भी इस हाईवे की गुणवत्ता बरकरार है और इस पर सफर करने वाले यात्री हमेशा इसकी गुणवत्ता और रखरखाव की तारीफ करते हैं। इस हाईवे का जब रखरखाव किया जाता है तब उसकी प्रक्रिया भी लगभग नए निर्माण जैसी होती है न की उस पर पैबंद लगाया जाता है। लब्बोलुआब यह है कि यदि इन दोनों विभाग के अधिकारी और जनप्रतिनिधि चाह लें तो शहर की सडक़ें करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी जिस बदहाल स्थिति में हैं उससे उबर सकती हैं।
गौरतलब है कि यह दोनों विभाग अधिकतर रखरखाव बारिश के मौसम में करते हैं जबकि नियमानुसार यह रखरखाव गर्मी और बारिश श्ुारू होने के बीच किया जाना चाहिए। इस वर्ष भी बारिश शुरू होने पर रखरखाव और नई सडक़ों का निर्माण शुरू किया गया जिसका असर आज शहर की हर सडक़ पर दिख रहा है। कमोबेश यही स्थिति बैतूल से औबेदुल्लागंज जाने वाले हाईवे पर भी दिखाई दे रही है जिसको लेकर कुछ ही दिन पूर्व बैतूल सांसद एवं केंद्रीय मंत्री डीडी उईके, विधायक एवं प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, डॉ. योगेश पंडाग्रे, समेत अन्य जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की बैठक संपन्न हुई जिसमें निर्देशित किया गया कि शीघ्र ही सडक़ का रखरखाव कर उसे उपयोग करने लायक बनाया जाए, पर समस्या यह है कि बारिश के मौसम में यदि रखरखाव किया भी जाएगा तो वह कुछ घंटे या दिन ही टिक पाएगा फिर उसकी स्थिति वैसी ही हो जाएगी।
बैतूल शहर में सडक़ निर्माण की नई तकनीक का उपयोग कर व्हाईट टॉपिंग सडक़ का निर्माण किया जा रहा है इसकी भी टाइमिंग देखा जाए तो बारिश के मौसम की शुरूआत के साथ ही हुई थी, यदि यह सडक़ बारिश के पहले बनाई जाती तो इसकी गुणवत्ता बेहतर होती और इसके निर्माण में लगने वाला समय बहुत कम होता।
पर यह सडक़ बारिश के आगाज़ के साथ ही शुरू हुई थी इसलिए बार-बार बारिश होने के चलते इसका समय बढ़ता जा रहा है। खबरवाणी ने बैतूल-औबेदुल्लागंज में लगातार लग रहे जाम को पूर्व में भी प्रमुखता से उठाया था और आज भी सुबह 7 बजे से लंबा जाम लग गया था जिसे बमुश्किल यातायात पुलिस द्वारा खुलवाया गया।
खबरवाणी ने बैतूल शहर की सडक़ों के हाल जानने के लिए शहर का जायजा लिया इसमें पूरे शहर की सडक़ें जर्जर ही मिली…

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