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हीरा-मोती की जोड़ी ने मारी बाजी, दो दिवसीय पट प्रतियोगिता का रोमांचक समापन
संतलाल धुर्वे ने 5.99 सेकेंड में जीता पहला स्थान, सैकड़ों बैलगाड़ियों की भागीदारी; सरपंच बोलीं,परंपरा और एकता का प्रतीक है आयोजन
भौंरा । मां विजासन माई मेले के अंतर्गत आयोजित सामान्य बैलगाड़ी दौड़ प्रतियोगिता का गुरुवार को रोमांचक समापन हुआ। दो दिनों तक चले इस आयोजन में क्षेत्र सहित अन्य जिलों से आई सैकड़ों बैलगाड़ियों ने भाग लिया, जिससे पूरे समय प्रतियोगिता स्थल पर उत्साह और प्रतिस्पर्धा का माहौल बना रहा। फाइनल मुकाबले में लापाझिरी निवासी संतलाल धुर्वे की बैल जोड़ी हीरा-मोती ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 सेकेंड 99 पॉइंट में दौड़ पूरी कर प्रथम स्थान प्राप्त किया और ₹11 हजार का पुरस्कार अपने नाम किया। दूसरे स्थान पर मौखा माल निवासी भजनलाल विश्वकर्मा की बैल जोड़ी रही, जिन्होंने 6 सेकेंड 11 पॉइंट का समय लिया, जबकि तीसरे स्थान पर पचामा निवासी कमलेश बारसे की बैल जोड़ी रही, जिन्होंने 6 सेकेंड 17 पॉइंट में दौड़ पूरी की।प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अन्य प्रतिभागियों को भी प्रोत्साहित करते हुए 20 अतिरिक्त पुरस्कार वितरित किए गए। बैतूल, हरदा और नर्मदापुरम सहित विभिन्न जिलों से पहुंचे प्रतिभागियों की भागीदारी ने प्रतियोगिता को और अधिक प्रतिस्पर्धी बना दिया। समापन अवसर पर आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में शाहपुर थाना प्रभारी अरविंद कुमरे, सरपंच मीरा धुर्वे, जनपद सदस्य सुधीर नायक, मंडल अध्यक्ष महेंद्र सिरोठिया, जय किशोर मिश्रा, तथा प्रतियोगिता अध्यक्ष रमेश गुप्ता सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
इस दौरान मेला समिति द्वारा ग्राम के वरिष्ठजनों एवं प्रतियोगिता में सहयोग देने वाले 30 से अधिक व्यक्तियों का शाल-श्रीफल एवं माला पहनाकर सम्मान किया गया।
सरपंच मीरा धुर्वे ने कहा कि बैलगाड़ी दौड़ जैसी पारंपरिक प्रतियोगिताएं हमारी संस्कृति की पहचान हैं। ऐसे आयोजन न केवल ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देते हैं, बल्कि समाज में आपसी सहयोग और एकता को भी मजबूत करते हैं। मेले के माध्यम से हमारी परंपराएं आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच रही हैं।
दो दिवसीय इस पट प्रतियोगिता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि ग्रामीण खेलों के प्रति लोगों का उत्साह आज भी बरकरार है, और यही उत्साह इस आयोजन की सबसे बड़ी ताकत है।






