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नर्मदा की लहरों में विलीन हो गए घर के चिराग

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खबरवाणी

नर्मदा की लहरों में विलीन हो गए घर के चिराग

बरमान घाट पर हादसे ने छीनी दो सगे मित्रों की जिंदगी

नरसिंहपुर। पवित्र मां नर्मदा का आंचल, जहां लोग शांति और पुण्य की तलाश में जाते हैं, बुधवार की दोपहर वहां से उठी एक चीख ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। बरमान के रेत घाट पर पिकनिक मनाने गए दो होनहार युवकों की जल-समाधि के साथ ही सिंधी कॉलोनी क्षेत्र के दो घरों के उजाले हमेशा के लिए बुझ गए।

​हंसी-ठिठोली के बीच पसरा मातम

​दोपहर का वक्त था, सूरज की रोशनी नर्मदा की लहरों पर खेल रही थी। सिंधी कॉलोनी, कृष्णा वार्ड निवासी संभव हरियानी (24 वर्ष) और सौरभ चावला (25 वर्ष) अपने दो अन्य साथियों के साथ हंसी-खुशी बरमान घाट पहुंचे थे। किसे पता था कि किनारे पर रखे उनके जूते और कपड़े उनके लौटने का इंतज़ार ही करते रह जाएंगे।

​आखरी वक्त तक संघर्ष

​प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नहाते समय अचानक गहराई का अंदाजा न होने के कारण दोनों युवक गहरे पानी की चपेट में आ गए। लहरों के बीच खुद को बचाने का संघर्ष और किनारों से मदद की पुकार… वहां मौजूद नाविकों ने अपनी जान पर खेलकर उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। मां नर्मदा की गहराई ने दोनों मित्रों को अपनी गोद में समेट लिया।

​छाई शोक की लहर

​जैसे ही यह खबर नरसिंहपुर के सिंधी कॉलोनी पहुंची, वहां सन्नाटा पसर गया।
​संभव हरियानी पिता कैलाश हरियानी का वह सहारा, जिसकी आंखों में भविष्य के कई सपने थे।
​सौरभ चावला पिता अनिल ‘अन्नू’ चावला का लाडला, जिसकी उम्र अभी महज 25 साल थी।
​शाम होते-होते मोहल्ले की गलियों में सिसकियों की आवाजें गूंजने लगीं। जो दोस्त साथ में हंसते-बोलते निकले थे, उनकी अर्थियां साथ उठेंगी, इस मंजर ने हर किसी की आंख नम कर दी है। प्रशासन ने शवों को बरामद कर लिया है, लेकिन उन परिवारों के घाव शायद ही कभी भर पाएं जिन्होंने अपने जिगर के टुकड़ों को खो दिया।

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