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मासोद में भंडारे के साथ हुआ पाच कुंडीय गायत्री महायज्ञ का समापन
मुलताई। ग्राम मासोद में चल रहे पांच कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का बुधवार को पूर्णाहुति एवं भंडारे के साथ समापन हुआ। कथावाचक सुभाष कुंभारे ने कहा कि मनुष्य एक भटका हुआ देवता हैं जो अपने अस्तित्व और विचारों से भटक गया है इसी उद्देश्य को साकार करने हेतु गायत्री परिवार के संस्थापक पुज्य गुरुदेव आचार्य श्रीराम शर्मा ने एक योजना बनाई जिसे युग निर्माण योजना नाम दिया गया, जिसके अंतर्गत मनुष्य में देवत्व का जागरण और धरती पर स्वर्ग सा अवतरण स्थापित किया जा सके। ग्राम में शक्ति कलश स्थापित कर पाच कुंडीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया। पूजा अर्चना की गई ग्राम की सुख समृद्धि एवं शांति के लिए ग्राम में चार दिनों से चल रहे पाच कुण्डीय महायज्ञ का समापन विशाल भंडारे के साथ किया गया। बुधवार को 5 कुंडीय गायत्री महायज्ञ में मंत्रोउच्चारण के साथ भारतीय वेशभूषा पहनकर पूर्णाहुति देने हजारों की संख्या में ग्रामीण वायगाव,मासोद, हिवरखेड़ ,शिरडी, साईखेड़ा सहित अन्य ग्रामो से हजारों की संख्या में पहुंचे।
गायत्री परिवार के प्रवक्ता सुभाष कुंभारे ने वैदिक सनातन परंपरा को बढ़ाते हुए 16 संस्कार में 65 यज्ञोपवित, दीक्षा संस्कार, पुंसवन संस्कार, विद्यारंभ संस्कार, मुंडन संस्कार, वैदिक पद्धति से कराए गए। महायज्ञ में ग्रामीणों ने ग्राम को स्वच्छ बनाने एवं नशा नहीं करने का संकल्प लिया तथा ग्राम में पंच परिवर्तन के साथ समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, एवं नागरिक शिष्टाचार का पालन करने का संकल्प पूर्णाहुति में सम्मिलित श्रद्धालुओं ने लिया। ग्राम में गायत्री मंदिर की स्थापना व सहयोग करने वाले वरिष्ठ नागरिक राधेलाल दियावार,गोंदलाल दियावार,विट्ठल राव दौड़के, भवराव जेवने का गायत्री परिवार मासोद द्वारा सम्मान किया गया।





