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Situation serious: पशुपतिनाथ की अष्टमुखी प्रतिमा में क्षरण 

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प्रतिमा लगभग 1200 साल पुरानी

Situation serious: मंदसौर के विश्वविख्यात भगवान पशुपतिनाथ की अष्टमुखी प्रतिमा में क्षरण और दरारें बढ़ती जा रही हैं, जिससे यह स्थिति गंभीर हो गई है। अब तक पांच मुखों तक सीमित ये दरारें अब छठे मुख तक फैल चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रतिमा के संरक्षण के लिए चिंता का विषय है, और इसके लिए विशेष केमिकल एक्सपर्ट और पर्याप्त बजट की आवश्यकता है।

प्रतिमा और इसकी ऐतिहासिक महत्ता

भगवान पशुपतिनाथ की अष्टमुखी प्रतिमा लगभग 1200 साल पुरानी है और 7 फीट ऊंची है। इसे ताम्रवर्णीय आग्नेय पत्थर से बनाया गया है, जो चिकना और चमकदार है। पुरातत्वविदों का कहना है कि यह पत्थर विशेष प्रकार का है और इसका क्षरण रोकने के लिए विशेष देखभाल की जरूरत है।

संरक्षण की अनदेखी

हालांकि मंदिर के आसपास विकास कार्य हो रहे हैं, जैसे कि 25 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहे ‘पशुपतिनाथ लोक’ के पहले चरण का निर्माण और शिवना नदी के शुद्धिकरण के लिए 29 करोड़ का प्रोजेक्ट, लेकिन प्रतिमा के संरक्षण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। मंदिर परिसर में 20 नवंबर को 64वां प्रतिष्ठा महोत्सव होना है, जिसकी तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं, लेकिन प्रतिमा की सुरक्षा को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई है।

प्रशासनिक कदम

विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान प्रतिमा की स्थिति का मामला तत्कालीन विधायक यशपालसिंह सिसौदिया और कलेक्टर दिलीपकुमार यादव के संज्ञान में आया था। वर्तमान कलेक्टर और मंदिर समिति की अध्यक्ष अदिति गर्ग हैं। विधायक और ट्रस्टी विपिन जैन ने कहा है कि वे मुख्यमंत्री को प्रतिमा के संरक्षण के लिए विस्तृत जानकारी भेजेंगे और आवश्यक केमिकल विशेषज्ञों और बजट की मांग करेंगे। उन्होंने कलेक्टर को भी इस मुद्दे से अवगत कराने की बात कही है।प्रतिमा के संरक्षण के लिए जल्द से जल्द कदम उठाना आवश्यक है, ताकि इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता बनी रहे।

source internet साभार…

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