Shri Vaishno Devi Chalisa: माता वैष्णो देवी को भारत की सबसे प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। जम्मू-कश्मीर के त्रिकुटा पर्वत की गुफा में विराजमान माता रानी को करोड़ों भक्त “पहाड़ों वाली माता” के नाम से पूजते हैं। मान्यता है कि माता वैष्णो देवी के दर्शन मात्र से बड़े-से-बड़ा संकट भी टल जाता है। जो श्रद्धालु किसी कारणवश गुफा तक नहीं जा पाते, वे घर बैठे वैष्णो देवी चालीसा का पाठ करके माता की कृपा पा सकते हैं।
माता वैष्णो देवी का पौराणिक स्वरूप
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता वैष्णो देवी मां पार्वती का ही स्वरूप हैं और काली, लक्ष्मी व सरस्वती की संयुक्त शक्ति से प्रकट हुई हैं। उन्हें वैष्णवी, त्रिकुटा देवी और माता रानी जैसे कई नामों से जाना जाता है। कहा जाता है कि कलियुग में माता वैष्णो देवी की आराधना सबसे शीघ्र फल देने वाली है।
वैष्णो देवी चालीसा पाठ के लाभ
नियमित रूप से मां वैष्णो देवी चालीसा का पाठ करने से मन को शांति मिलती है, भय और नकारात्मकता दूर होती है। भक्तों का विश्वास है कि इससे रोग, शोक, कर्ज और बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं। विशेष रूप से नवरात्रि, शुक्रवार और सोमवार को इसका पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है।
श्री वैष्णो देवी चालीसा (संक्षिप्त अंश)
॥ दोहा ॥
गरुड़ वाहिनी वैष्णवी, त्रिकुटा पर्वत धाम।
काली लक्ष्मी सरस्वती, करहु शक्ति प्रणाम॥
॥ चौपाई ॥
नमो नमो वैष्णो वरदानी, कलियुग शुभ फलदा भवानी।
मणि पर्वत पर ज्योति तुम्हारी, पिंडी रूप विराजत न्यारी॥
देव दनुज सब शीश नवावें, संकट से जन सदा बचावें॥
जो कोई मन से ध्यावे माता, सुख-संपत्ति भरपूर वह पाता॥
(भक्त संपूर्ण चालीसा श्रद्धा भाव से पाठ करें)
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चालीसा पाठ की सही विधि
चालीसा पाठ से पहले स्नान कर साफ कपड़े पहनें। माता की तस्वीर या प्रतिमा को पूर्व दिशा में स्थापित करें। दीपक जलाकर, लाल या पीले फूल अर्पित करें और शांत मन से चालीसा का पाठ करें। अंत में माता रानी से अपनी मनोकामना कहें और प्रसाद बांटें।





