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हरियाली पर आरी: आरा मशीनों तक पहुंच रहे हरे-भरे पेड़, जिम्मेदारी किसकी
पूजनीय वृक्ष भी नहीं बख्शे जा रहे, जलाऊ लकड़ी के नाम पर कटाई विभाग सवालिया निशान पर
बुरहानपुर।
शहर और आसपास के क्षेत्रों में हरे-भरे पेड़ों की कटाई तेजी से सामने आ रहा है। विशेष रूप से आरा मशीनों पर ताजा कटे पेड़ों का पहुंचना कई सवाल खड़े कर रहा है। सुत्रो से मिली जानकारी के अनुसार, जलाऊ लकड़ी के नाम पर हरे-भरे पेड़ों को काटकर खुलेआम आरा मशीनों तक पहुंचाया जा रहा है, जिसमें धार्मिक दृष्टि से पूजनीय माने जाने वाले पेड़ भी शामिल हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है वृक्षों की पूजा की जाती है, उन्हें जीवनदायी माना जाता है, इसके बावजूद इनकी कटाई होना न केवल पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है बल्कि सामाजिक और धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंचाता है।
सूत्रों के मुताबिक, पेड़ों की कटाई कर उन्हें दिन में लकड़ी के रूप में आरा मशीनों तक पहुंचाया जाता है। इस पूरे मामले में संबंधित विभाग की निगरानी और कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
कटाई का तरीका और बहाना
जानकार बताते हैं कि हरे पेड़ों को काटने के बाद उन्हें “सूखी लकड़ी” या “जलाऊ लकड़ी” बताकर परिवहन किया जाता है। इस तरीके से नियमों को दरकिनार कर अवैध कटाई को अंजाम दिया जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहर के किनारों तक पेड़ों की संख्या में कमी देखी जा रही है, जिससे पर्यावरण संतुलन पर भी असर पड़ सकता है। गर्मी के मौसम में जहां हरियाली की जरूरत अधिक होती है, वहीं पेड़ों की अंधाधुंध कटाई चिंता का विषय बन गई है।
विभाग की भूमिका पर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या विभाग को इसकी जानकारी नहीं है या फिर यह लापरवाही का मामला है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि नियमित निगरानी और जांच हो, तो इस तरह की गतिविधियों पर आसानी से रोक लगाई जा सकती है।
लेकिन लोगों में यह चर्चा जरूर है कि जिम्मेदारी तय होना जरूरी है—चाहे वह विभाग की हो या अवैध कटाई करने वालों की।
पर्यावरण और समाज पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे वृक्ष वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनकी कटाई से न केवल वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है, बल्कि स्थानीय जैव विविधता भी प्रभावित होती है।
इसके अलावा, धार्मिक आस्था से जुड़े पेड़ों की कटाई से समाज में असंतोष भी बढ़ सकता है, जो सामाजिक समरसता के लिए ठीक नहीं है।
कानूनी प्रावधान क्या कहते हैं
वन संरक्षण से जुड़े नियमों के अनुसार, बिना अनुमति हरे पेड़ों की कटाई करना दंडनीय अपराध है। इसके लिए संबंधित विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
यदि कोई व्यक्ति या संस्था हरे पेड़ों को काटकर उन्हें गलत तरीके से परिवहन करती है, तो यह भी कानून के दायरे में अपराध की श्रेणी में आता है।
जांच और कार्रवाई की जरूरत
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। आरा मशीनों पर पहुंच रही लकड़ी की जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि वह वैध रूप से लाई गई है या नहीं।
इसके साथ ही, कटाई करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी उठ रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
जिम्मेदारी तय करना जरूरी
यह मामला केवल पेड़ों की कटाई का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और जवाबदेही का भी है। यदि विभाग समय रहते कार्रवाई नहीं करता है, तो यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि संबंधित विभाग इस ओर क्या कदम उठाता है और क्या वास्तव में हरियाली को बचाने के लिए ठोस प्रयास किए जाते हैं या नहीं।





