Rajya Sabha Election 2026: देशभर में 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं, लेकिन तेलंगाना की सियासत सबसे ज्यादा गरमाई हुई है। कांग्रेस को भरोसा था कि अप्रैल में खाली हो रही दो सीटें वह आराम से जीत लेगी, लेकिन अब समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। बीआरएस चीफ केसीआर के एक फैसले ने पूरा गेम पलट दिया है।
केसीआर का बड़ा दांव, कांग्रेस की टेंशन बढ़ी
K. Chandrashekar Rao यानी केसीआर ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी कम से कम एक उम्मीदवार जरूर उतारेगी। इससे कांग्रेस की राह आसान नहीं रही।
कांग्रेस को उम्मीद थी कि मुकाबला एकतरफा रहेगा, लेकिन अब ये चुनाव सिर्फ नंबर गेम नहीं, बल्कि साख की लड़ाई बन गया है। केसीआर किसी बड़े चेहरे को मैदान में उतारने की तैयारी में हैं।
तेलंगाना विधानसभा का गणित समझिए
Telangana विधानसभा में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। बीआरएस के पास कागजों में 37 विधायक हैं। हालांकि, इनमें से 10 विधायक बगावत कर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं और उनकी अयोग्यता का मामला लंबित है।
अगर बीआरएस अपने सभी विधायकों को साथ रख लेती है, तो उसे सिर्फ 4 और विधायकों की जरूरत होगी। यही वो गणित है जो कांग्रेस की नींद उड़ा रहा है।
AIMIM और बीजेपी की भूमिका अहम
राज्य में All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen के 7 विधायक हैं, जबकि Bharatiya Janata Party के पास 8 विधायक हैं। अगर बीआरएस इन दोनों दलों का समर्थन जुटा लेती है, तो मुकाबला कांटे का हो सकता है।
कांग्रेस के पास 66 विधायक और एक सीपीआई विधायक का समर्थन है, लेकिन अंदरूनी खींचतान भी कम नहीं है।
कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार कौन?
कांग्रेस एक सीट पर वरिष्ठ नेता Abhishek Manu Singhvi को दोबारा भेजने पर विचार कर रही है। दूसरी सीट के लिए सीएम सलाहकार वी. नरेंद्र रेड्डी और रिटायर्ड जज जस्टिस सुधर्शन रेड्डी के नाम चर्चा में हैं।
लेकिन बीआरएस की एंट्री से कांग्रेस हाईकमान की धड़कन तेज हो गई है। अब रणनीति, जोड़-तोड़ और गठबंधन की राजनीति ही जीत तय करेगी।
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अब साख की लड़ाई बनी राज्यसभा की जंग
यह चुनाव अब सिर्फ सीटों का मामला नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है। केसीआर का दांव कांग्रेस की “पक्की सीट” पर भारी पड़ सकता है।
तेलंगाना की राज्यसभा जंग अब और भी दिलचस्प हो गई है। आने वाले दिनों में किसका दांव सही बैठेगा, ये देखना बड़ा मजेदार होगा। फिलहाल सियासी गलियारों में बस एक ही चर्चा है – किसका गणित सही और किसकी चाल बाजी मार जाएगी!





