राजस्थान, जो अभी तक समुद्र से दूर माना जाता था, अब पानी के रास्ते अरब सागर से सीधे जुड़ने जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर देश के सबसे बड़े इनलैंड पोर्ट को जलोर जिले में विकसित करने की तैयारी पूरी कर ली है। यह 262 किलोमीटर लंबा जलमार्ग न सिर्फ राजस्थान की अर्थव्यवस्था बदल देगा, बल्कि प्रदेश को नए औद्योगिक युग की ओर ले जाएगा।
राजस्थान को मिलेगा समुद्री रास्ता – अब रेगिस्तान भी बनेगा ट्रेडिंग हब
जलोर जिले में बनने वाला यह इनलैंड पोर्ट सीधे गुजरात के कांडला पोर्ट से कनेक्ट होगा।
- 262 किमी लंबा जलमार्ग
- अरब सागर तक सीधी पहुँच
जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत के अनुसार, इस प्रोजेक्ट की ड्रेजिंग लागत 10,000 करोड़ रुपये से अधिक रहने वाली है। राज्य सरकार लगभग 14 किमी भूमि उपलब्ध करवाएगी और पोर्ट का संचालन भी खुद करेगी।
यह पोर्ट जवाई–लूणी–रन ऑफ कच्छ नदी प्रणाली पर विकसित होगा, जिसे पहले ही सरकार द्वारा राष्ट्रीय जलमार्ग-48 (NW-48) घोषित किया जा चुका है।
‘न्यू राजस्थान’ की नींव – विकास का नया दरवाज़ा
मंत्री रावत ने इस प्रोजेक्ट को पश्चिमी राजस्थान के लिए “दुनिया से जुड़ने का नया पुल” बताया है।
इस पोर्ट के बन जाने से—
- व्यापार बढ़ेगा
- उद्योगों को नई दिशा मिलेगी
- रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे
कुल मिलाकर यह प्रोजेक्ट राजस्थान में एक आर्थिक क्रांति की शुरुआत करेगा।
सस्ती और आसान ट्रांसपोर्ट – व्यापारियों को बड़ी राहत
इस जलमार्ग के शुरू होने से भारी माल ढुलाई का बोझ सड़क और रेल से कम हो जाएगा।
फ़ायदे—
- ट्रांसपोर्ट कॉस्ट में बड़ी कमी
- तेज़ और सुरक्षित माल परिवहन
- निर्यात करने वाली कंपनियों के लिए समय और पैसे की बचत
जालोर, बाड़मेर और आसपास के जिलों के टेक्सटाइल, ग्रेनाइट, ग्वार, दालें, बाजरा, तिलहन और कृषि उत्पादों के निर्यात को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।
रिफाइनरी और इंडस्ट्री को बड़ा फायदा – बनेगा नया बिज़नेस बेल्ट
बलोत्रा स्थित HPCL रिफाइनरी को कच्चा तेल और तैयार उत्पाद भेजने का एक तेज़ और सस्ता विकल्प मिलेगा।
इसके अलावा—
- लॉजिस्टिक पार्क
- कोल्ड स्टोरेज
- वेयरहाउस
- नए औद्योगिक क्लस्टर
इस पोर्ट के आसपास तेज़ी से विकसित होंगे।
सीधे समुद्री संपर्क के कारण बड़े निवेशकों की नज़र अब पश्चिमी राजस्थान पर टिकेगी।
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तैयारी लगभग पूरी – DPR से MoU तक सब फाइनल
- IIT मद्रास ने DPR तैयार कर सरकार को सौंप दी है।
- राजस्थान सरकार इसे स्टडी कर रही है और जल्द ही साइट विज़िट के बाद अंतिम रिपोर्ट देगी।
- पिछले महीने राजस्थान रिवर बेसिन एंड वाटर रिसोर्सेज प्लानिंग ऑथोरिटी और इनलैंड वाटरवेज़ अथॉरिटी ऑफ इंडिया के बीच मुंबई में MoU साइन हुआ है।
अब बस अंतिम मंज़ूरी के बाद राजस्थान का सपना पूरा होने वाला है—
“समुद्र से जुड़ा राजस्थान… एक नए विकास युग की ओर।”





