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मां ताप्ती की दुर्दशा पर फिर उठे सवाल

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खबरवाणी

मां ताप्ती की दुर्दशा पर फिर उठे सवाल

नालों का गंदा पानी, प्लास्टिक और कचरे से बढ़ता प्रदूषण; समाजसेवी ने की ठोस कार्रवाई की मांग

बुरहानपुर। ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की धरोहर मानी जाने वाली बुरहानपुर शहर की जीवनरेखा ताप्ती नदी इन दिनों गंभीर प्रदूषण की समस्या से जूझती नजर आ रही है। शहर के विभिन्न हिस्सों से निकलने वाले नालों का गंदा पानी प्रतिदिन नदी में मिल रहा है, जिससे नदी का जल स्तर ही नहीं बल्कि उसकी स्वच्छता भी प्रभावित हो रही है। इस मुद्दे को लेकर स्थानीय समाजसेवि ने प्रशासन के समक्ष चिंता व्यक्त करते हुए शीघ्र समाधान की मांग की है।
नालों के जरिए पहुंच रहा कचरा
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, कई स्थानों पर नालों के माध्यम से घरेलू गंदगी, प्लास्टिक, पॉलिथीन और फटे-पुराने कपड़े सीधे नदी में बहकर पहुंच रहे हैं। घाटों के आसपास तैरता कचरा साफ दिखाई देता है, जिससे न केवल नदी की सुंदरता प्रभावित हो रही है बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
नदी किनारे रहने वाले लोगों का कहना है कि बरसात और सामान्य दिनों में भी यह स्थिति बनी रहती है। नालों से आने वाला गंदा पानी बिना किसी शोधन प्रक्रिया के सीधे नदी में गिरता है। इससे जल की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि संबंधित विभागों द्वारा जल परीक्षण की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।

धार्मिक स्थलों पर भी असर

ताप्ती नदी क्षेत्र में कई धार्मिक स्थल स्थित हैं, जहां प्रतिदिन श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। बढ़ते प्रदूषण और गंदगी से इन धार्मिक स्थलों की पवित्रता और स्वच्छता पर भी असर पड़ रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि नदी तट की साफ-सफाई और संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि धार्मिक आस्था को ठेस न पहुंचे।

समाजसेवी ने उठाई आवाज

इस समस्या को लेकर शहर के पीपल घाट एक समाजसेवी ने नगर निगम और संबंधित अधिकारियों को कई बार शिकायतें की हैं। उनका कहना है कि मौखिक और लिखित शिकायतों के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पाई है। समाजसेवी ने मांग की है कि नालों के पानी को सीधे नदी में जाने से रोका जाए तथा इसके लिए स्थायी व्यवस्था की जाए।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि नदी में कचरा फेंकने वालों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया जाए और आवश्यक होने पर नियमों के तहत कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।

नगर निगम के अधिकारी को शिकायत कर ने के बाद भी कोई सुरक्षित कदम नहीं उठाए गए नागरिकों की सहभागिता के बिना नदी को पूरी तरह स्वच्छ रखना संभव नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे प्लास्टिक और अन्य कचरा नालों या नदी में न डालें।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े जानकारों का मत है कि किसी भी नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए दीर्घकालिक योजना, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की प्रभावी व्यवस्था और जनजागरूकता आवश्यक है।
समाधान की जरूरत
विशेषज्ञों और नागरिकों ने निम्न कदम उठाने की मांग की है—
नालों के गंदे पानी के लिए शोधन संयंत्र (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) की प्रभावी व्यवस्था।
नदी तटों पर नियमित सफाई और निगरानी।
प्लास्टिक उपयोग पर नियंत्रण और जनजागरूकता अभियान।

जल गुणवत्ता की नियमित जांच और रिपोर्ट

सार्वजनिक करना।
मां ताप्ती केवल एक नदी नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का प्रतीक है। उसकी स्वच्छता और संरक्षण प्रशासन और नागरिकों दोनों की साझा जिम्मेदारी है। समाजसेवियों द्वारा उठाई गई यह आवाज अब प्रशासनिक कार्रवाई की दिशा में कितना असर डालती है, यह आने वाला समय बताएगा। फिलहाल, शहरवासियों को उम्मीद है कि ताप्ती की निर्मल धारा को पुनः स्वच्छ बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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