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खुले में बिक रही खाद्य सामग्री पर उठे सवाल, नियमों की अनदेखी से बीमारी का खतरा
धूल-मिट्टी, मक्खियों और प्रदूषण के बीच तैयार हो रहे समोसे-कचौरी; सुत्रो से मिली जानकारी के अनुसार
बुरहानपुर। शहर के विभिन्न बाजार क्षेत्रों और मुख्य मार्गों पर खुले में खाद्य सामग्री बेचे जाने को लेकर नागरिकों में नाराजगी देखी जा रही है। कई स्थानों पर समोसे, कचौरी, भजिए और अन्य नाश्ते खुले में बिना ढके रखे जा रहे हैं, जिन पर धूल-मिट्टी, मक्खियां और वाहनों से निकलने वाला धुआं सीधे बैठ रहा है। इससे आमजन के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि व्यस्त सड़कों और चौक-चौराहों पर लगने वाले ठेलों व दुकानों में खाद्य सामग्री को स्वच्छ तरीके से संरक्षित नहीं किया जा रहा। मक्खियां खाद्य पदार्थों पर लगातार भिनभिनाती रहती हैं और कई बार तैयार होते समय भी उन पर बैठ जाती हैं। इसके अलावा, बार-बार एक ही तेल का उपयोग तलने के लिए किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं, जो स्वास्थ्य मानकों के विपरीत माना जाता है।
प्रदूषण का सीधा असर
वाहनों की अधिक आवाजाही वाले इलाकों में निकलने वाला धुआं सीधे खाद्य सामग्री तक पहुंच रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार धुएं में मौजूद सूक्ष्म कण और प्रदूषक तत्व भोजन को दूषित कर सकते हैं। खुले में रखे नाश्ते पर धूल के कण स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं, जिससे पेट संबंधी रोग, संक्रमण और फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ सकता है।
नियम क्या कहते हैं?
खाद्य विक्रेताओं के लिए स्वच्छता और गुणवत्ता बनाए रखना अनिवार्य है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुसार खाद्य पदार्थों को ढककर रखना, साफ-सफाई सुनिश्चित करना और उपयोग किए जाने वाले तेल की गुणवत्ता का ध्यान रखना आवश्यक है। खाद्य व्यवसाय संचालकों को लाइसेंस/पंजीयन प्राप्त कर निर्धारित मानकों का पालन करना होता है।
जानकारों का कहना है कि नियमों के तहत बार-बार उपयोग किए गए तेल का प्रयोग सीमित मात्रा में और निर्धारित मानकों के अनुसार ही किया जा सकता है। अत्यधिक उपयोग से तेल में हानिकारक तत्व बढ़ सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं।
‘खाना पूर्ति’ दिखावा
संबंधित विभाग द्वारा समय-समय पर औपचारिक जांच तो की जाती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। है।
सूत्रों का कहना है कि यदि किसी भी विक्रेता द्वारा खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार चालानी कार्रवाई, जुर्माना या लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई की जा सकती है।
जागरूकता और सख्ती दोनों जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य सुरक्षा केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि दुकानदारों और उपभोक्ताओं की भी साझा जिम्मेदारी है। विक्रेताओं को स्वच्छता मानकों का पालन करना चाहिए, वहीं उपभोक्ताओं को भी साफ-सुथरी और ढकी हुई खाद्य सामग्री ही खरीदनी चाहिए।
शहर के सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि नगर निगम और खाद्य विभाग संयुक्त रूप से अभियान चलाकर नियमित निरीक्षण करें, तेल की जांच के लिए सैंपल लें और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई करें।
यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बदलते मौसम में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। नागरिकों ने कि खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए व्यापक अभियान चलाया जाए, ताकि आमजन को सुरक्षित और स्वच्छ भोजन उपलब्ध हो सके।





