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संतों और बटुकों के साथ दुर्व्यवहार के विरोध में प्रदर्शन, दोषियों पर कार्रवाई की मांग
नरसिंहपुर। शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज, नन्हें बटुकों एवं बुजुर्ग साधु संतों के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा की गई बर्बरता तथा मौनी अमावस्या पर्व सनातन परंपरा अनुसार स्नान से रोके जाने के संबंध में कठोर कार्रवाई करने की मांग को लेकर सर्व हित सर्व ब्राह्मण सभा की नरसिंहपुर इकाई द्वारा राष्ट्रपति एवं राज्यपाल के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के पूर्व विरोध प्रदर्शन करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार की कार्रवाई की निंदा की गई। ज्ञापन में उल्लेख किया कि संत समाज एवं सनातन धर्म में आस्था रखने वालों में अत्यंत पीडा और आक्रोश है। सनातन परंपरा के अनुसार मौनी अमावस्या पर घाट पर शंकराचार्य जी को स्नान करने से भी रोका गया, जो न केवल धार्मिक भावनाओं पर आघात है बल्कि भारत के संविधान का उल्लंघन भी हैं। भारत का संविधान अनुच्छेद 25 के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन, आचरण एवं प्रचार करने का अधिकार प्रदान करता है। संती, धर्माचार्यों और मासूम बच्चों पर बल प्रयोग कर उन्हें धार्मिक अनुष्ठान से वंचित करना लोकतंत्र, संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता की मूल भावना के विपरीत है। संत समाज पर किया गया यह दुर्व्यवहार केवल एक व्यक्ति या समुदाय पर नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आस्था और संविधान प्रदत अधिकारों पर सीधा प्रहार है। यदि इस प्रकार की घटनाओं पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया तो यह भविष्य में सामाजिक सौहार्द एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। मांग की गई कि संपूर्ण घटना उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, दोषी पुलिस अधिकारियों एवं जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए, भविष्य में संतों, धर्माचार्यों एवं श्रद्धालुओं के संवैधानिक उपासना अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। इस निंदनीय कार्य के लिये दोषी पाये जाने वाले के द्वारा क्षमा याचना की जावे ।





