Premanand Ji Maharaj: अक्सर भक्तों के मन में यह सवाल उठता है कि हम भगवान का नाम तो जपते हैं, लेकिन मन इधर-उधर भटकता रहता है। ऐसे में क्या इस नाम जप का कोई लाभ मिलता है या नहीं? इसी सवाल का बेहद सरल और सटीक जवाब प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज ने दिया है। उनका कहना है कि नाम जप कभी व्यर्थ नहीं जाता, चाहे मन साथ दे या नहीं।
प्रेमानंद महाराज का स्पष्ट उत्तर
एक सत्संग के दौरान जब एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से पूछा कि “अगर नाम जप करते समय मन कहीं और चला जाए, तो क्या यह भगवान का अपमान है?” इस पर बाबा ने मुस्कुराते हुए कहा, “बिल्कुल नहीं। नाम जप करने से हर हाल में लाभ होता है।” उन्होंने साफ कहा कि भाव हो या न हो, श्रद्धा हो या न हो, नाम का असर जरूर पड़ता है।
अग्नि का उदाहरण देकर समझाया सत्य
प्रेमानंद महाराज ने नाम की शक्ति को समझाने के लिए बड़ा देसी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “आग को छूने से जलन होगी ही। चाहे जानबूझकर छूओ, अनजाने में छूओ या किसी ने धोखे से हाथ लगवा दिया हो, आग अपना काम करेगी।” ठीक वैसे ही, भगवान का नाम भी अपना असर दिखाता है। मन लगे या न लगे, नाम जप आत्मा को शुद्ध करता ही है।
नाम में छुपी है अद्भुत शक्ति
बाबा बताते हैं कि भगवान के नाम में अद्भुत, दिव्य और कल्याणकारी शक्ति छुपी होती है। कई बार इंसान नाम जप तो करता है, लेकिन तुरंत कोई अनुभव नहीं होता। इसका मतलब यह नहीं कि नाम असर नहीं कर रहा। नाम भीतर-ही-भीतर मन, बुद्धि और संस्कारों को बदलने लगता है, जिसका फल समय आने पर जरूर मिलता है।
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मन भटके तो भी नाम मत छोड़िए
प्रेमानंद महाराज का सबसे बड़ा संदेश यही है कि अगर आज मन भटक रहा है, श्रद्धा डगमगा रही है या विश्वास कम लग रहा है, तब भी नाम जप मत छोड़िए। बाबा कहते हैं, “नाम जप करते-करते एक दिन खुद नाम आपको पकड़ लेगा।” धीरे-धीरे मन शांत होगा, विश्वास बढ़ेगा और नाम की शक्ति खुद अनुभव में आने लगेगी।





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