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Political News – 71 वर्षों में कुंबी 36 लड़े – 24 हारे

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हर बार नहीं चलते जातिगत समीकरण

Political Newsबैतूल आदिवासी बाहुल्य इस जिले में अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी भी आदिवासियों से लगभग बराबर की स्थिति में है। इस पिछड़ा वर्ग को अगर जाति में विभाजित करें तो जिले में प्रथम स्थान पर कुंबी समाज, दूसरे स्थान पर पंवार, तीसरे स्थान पर किराड़ एवं उसके बाद राठौर तेली समाज तथा अन्य समाज की जनसंख्या की स्थिति है। और यही कारण है कि अन्य पिछड़ा वर्ग में कुंबी समाज को सभी राजनैतिक दल, संगठन और सत्ता की राजनीति में महत्व देते आए हैं।

बैतूल और मुलताई दोनों ही अनारक्षित विधानसभा सीटें हैं। यहां माना जाता है कि कुंबी समाज बहुतायत में है। लेकिन मुलताई में पंवार समाज भी मजबूत स्थिति में है। इसी तरह से जिले का आठनेर क्षेत्र का एक बड़ा भाग किराड़ बाहुल्य है। चुनावी राजनीति की बात करें तो 71 साल में बैतूल जिले में 36 कुंबी प्रत्याशी जनसंघ, जनता पार्टी, भाजपा, कांग्रेस एवं निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ चुके हैं जिनमें 24 बार कुंबी समाज के प्रत्याशी चुनाव हारे हैं। वहीं 12 बार चुनाव जीतने वाले कुंबी समाज के प्रत्याशियों में डॉ. अशोक साबले, सुखदेव पांसे और चंद्रशेखर देशमुख एक से अधिक बार चुनाव जीते हैं।

कांग्रेस के जीते कुंबी उम्मीदवार | Political News

1952 मासोद आनंदराव लोखण्डे
1967 मासोद बुधराव देशमुख
1972 बैतूल डॉ. मारोतीराव पांसे
1985 बैतूल डॉ. अशोक साबले
1993 बैतूल डॉ. अशोक साबले
2003 मासोद सुखदेव पांसे
2008 मुलताई सुखदेव पांसे
2018 मुलताई सुखदेव पांसे

कांग्रेस के हारे कुंबी उम्मीदवार

1977 बैतूल डॉ. मारोतीराव पांसे
1980 बैतूल डॉ. मारोतीराव पांसे
1990 बैतूल डॉ. अशोक साबले
1998 मुलताई डॉ. पंजाबराव बोडख़े
2013 बैतूल हेमंत वागद्रे
2013 मुलताई सुखदेव पांसे

भाजपा से जीते कुंबी उम्मीदवार

1990 मासोद वासुदेव ठाकरे
1998 मासोद चंद्रशेखर देशमुख
2013 मुलताई चंद्रशेखर देशमुख

भाजपा से हारे कुंबी उम्मीदवार | Political News

1972 मासोद बुधराव पांडू
1977 मासोद इसनाजी उघड़े
1980 मासोद वासुदेव ठाकरे
1985 बैतूल पंजाबराव महस्की
1985 मासोद वासुदेव ठाकरे
1993 मासोद ओमकार बर्डे
2003 मुलताई डॉ. जीए बारस्कर
2003 मासोद चंद्रशेखर देशमुख
2008 मुलताई चंद्रशेखर देशमुख

निर्दलीय जीते कुंबी उम्मीदवार

1957 मासोद आनंदराव लोखण्डे
1993 मुलताई डॉ. पंजाबराव बोडख़े

निर्दलीय हारे कुंबी उम्मीदवार

1962 मुलताई पर्वतराव
2003 बैतूल डॉ. अशोक साबले (सपा)
2003 बैतूल श्यामराव बारस्कर (एनसीपी)
2008 बैतूल तिलक पटेल (बसपा)
2018 बैतूल लता म्हस्की

लोकसभा चुनाव नहीं जीते कुंबी उम्मीद्वार | Political News

1967 बैतूल शिवाजी राव (आरपीआई)
1980 बैतूल भगवतराव कवडक़र (जनता एस)
1989 बैतूल भगवंतराव कवडक़र (लोकदल)
1998 बैतूल डॉ. अशोक साबले (कांग्रेस)
2008 उपचुनाव सुखदेव पांसे (कांग्रेस)

जब-जब लड़े दो कुंबी: दोनों हारे

1952 से 2013 तक जब-जब कांग्रेस-भाजपा ने जिले की अनारक्षित सीटों बैतूल, मुलताई और मासोद पर कुंबी उम्मीदवारों को एक साथ लड़ाया तब अधिकांश दोनों कुंबी उम्मीदवार चुनाव हार गए।

1985 में भाजपा ने बैतूल से पंजाबराव महस्की और मासोद से वासुदेव ठाकरे को टिकट दी तो दोनों चुनाव हार गए।
2003 में भाजपा ने मुलताई से जीए बारस्कर और मासोद से चंद्रशेखर देशमुख को लड़ाया और दोनों ही चुनाव हार गए।
2013 में कांग्रेस ने बैतूल से हेमंत वागद्रे और मुलताई से सुखदेव पांसे को चुनाव लड़वाया और दोनों चुनाव हार गए।
1993 में अपवाद स्वरूप बैतूल से कांग्रेस उम्मीदवार डॉ. अशोक साबले और मुलताई से निर्दलीय डॉ. पंजाबराव बोडख़े चुनाव जीते लेकिन मासोद से भाजपा के ओमकार बर्डे चुनाव हार गए।

2023 में बैतूल-मुलताई पर सबकी निगाह

भाजपा से एक कुंबी उम्मीदवार चंद्रशेखर देशमुख को 2023 के लिए मुलताई से उम्मीदवार घोषित कर दिया है। वहीं बैतूल विधानसभा सीट से भी कुंबी समाज के दिनेश मस्की ने भाजपा से टिकट के लिए दावा ठोंका है। जिस तरीके से एक ही पार्टी द्वारा दोनों कुंबी उम्मीदवार को जब-जब जिले की अनारक्षित सीटों से टिकट दी है दोनों ही हारे हैं। इसलिए बैतूल विधानसभा सीट से 2023 के लिए गैर कुंबी का भाजपा की टिकट पर चुनाव लडऩे की संभावना अधिक है।

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