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Political News – जिसकी सरकार उसके पार्षद का हो जाता मनोनयन

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Political Newsबैतूल जिले की मुलताई नगर पालिका परिषद में निर्वाचित अध्यक्ष का चुनाव न्यायालय से शून्य घोषित होने के बाद नए चुनाव के पूर्व ही पार्षद को अध्यक्ष के रूप में शासन ने मनोनीत कर दिया है। और ऐसा मनोनयन जिले में पहली बार नहीं हुआ है। इसके पूर्व बैतूल नगर पालिका परिषद में तो लगातार दो बार अध्यक्ष के मनोनयन की स्थिति बनी थी।

अगस्त 2022 में मुलताई नगर पालिका परिषद में भाजपा के विद्रोही पार्षदों के बल पर कांग्रेस के समर्थन से नीतू परमार नपाध्यक्ष निर्वाचित हो गई थी और उन्होंने भाजपा की वर्षा गढ़ेकर को पराजित किया था। गत दिवस न्यायालय का निर्णय आने के बाद नीतू परमार को अध्यक्ष पद छोडऩा पड़ा लेकिन अध्यक्ष पद के लिए पार्षदों के बीच नए चुनाव के पहले ही भाजपा सरकार ने भाजपा पार्षद वर्षा गढ़ेकर को अगले आदेश तक अध्यक्ष मनोनीत कर दिया है और उन्होंने कार्यभार भी संभाल लिया है। ऐसा ही पूर्व में प्रदेश में कांग्रेस सरकार के दौरान बैतूल नगर पालिका में लगातार दो बार हो चुका है।

राठौर के स्थान पर मनोनीत हुए थे शर्मा अध्यक्ष | Political News

नगर पालिका परिषद बैतूल में 1978 में वर्षों बाद पार्षद और अध्यक्ष का चुनाव हुआ था। लेकिन उसके बाद फिर 1994 तक प्रशासनिक अधिकारी कार्यभार संभालते रहे। 1994 में पुन: नपा के चुनाव हुए और वर्ष के अंतिम दिन 31 दिसम्बर 1994 को भाजपा के शिवप्रसाद राठौर अध्यक्ष निर्वाचित हुए। जो 29 सितम्बर 1997 तक अध्यक्ष बने रहे। उस दौरान प्रदेश में कांग्रेस की दिग्विजय सरकार थी। शिवप्रसाद राठौर के हटने के एक दिन बाद ही 30 सितम्बर 1997 को कांग्रेस पार्षद धीरू शर्मा को कांग्रेस सरकार ने नपा अध्यक्ष मनोनीत किया। लेकिन न्यायालीन प्रक्रिया के दौरान धीरू शर्मा की तरफ से पैरवी में कमी के चलते एकतरफा आदेश हो गया और धीरू शर्मा को नपाध्यक्ष पद से 12 नवम्बर 1997 को ही हटना पड़ा। तब तत्कालीन नपा उपाध्यक्ष दीनाजी यादव को 12 नवम्बर को नपाध्यक्ष का कार्यभार सौंपा जो 19 जनवरी 2000 तक कार्यकाल पूरा होने तक बने रहे।

सात दिन नपा अध्यक्ष रही मीरा एंथोनी

प्रदेश में कांग्रेस की दिग्विजय सरकार के दौरान ही बैतूल नगर पालिका परिषद में हुए नपा के चुनाव में एक बार फिर भाजपा का अध्यक्ष निर्वाचित हुआ और 20 जनवरी 2000 को भाजपा के आनंद प्रजापति नपाध्यक्ष बने। जिन्हें प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने कई कारणों के चलते नपाध्यक्ष से 31 अक्टूबर 2002 को हटा दिया। और उसके एक दिन बाद ही राज्य शासन ने कांग्रेस की पार्षद श्रीमती मीरा एंथोनी को बैतूल नपाध्यक्ष मनोनीत कर दिया। लेकिन वे इस पद पर मात्र सात दिन ही 8 नवम्बर 2002 तक कार्यरत रह पाई। और आनंद प्रजापति ने फिर एक बार 9 नवम्बर 2002 को नपाध्यक्ष का कार्यभार ग्रहण किया और वे 19 जनवरी 2005 तक अध्यक्ष रहे।

आमला नपा में भी हुआ था दो बार चुनाव | Political News

नगर पालिका परिषद आमला में 2005 में समाजवादी पार्टी की शांतादेवी सातनकर अध्यक्ष निर्वाचित हुई थी लेकिन सपा के दो पार्षदों सहित अन्य पार्षदों ने कार्यकाल के दौरान नपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया और पुन: खाली कुर्सी भरी कुर्सी का चुनाव हुआ। जिसमें जनता ने पुन: शांतादेवी सातनकर पर भरोसा जताया और उन्होंने अपना कार्यकाल पूर्ण किया। इसी तरह से 2010 में कांग्रेस के मनोज मालवे नपाध्यक्ष के रूप में अपना कार्य कर रहे थे लेकिन कार्यकाल के अंतिम वर्ष में इनके खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव लाया गया लेकिन श्री मालवे ने भी खाली कुर्सी, भरी कुर्सी के चुनाव में सफल होकर 2015 तक अपना कार्यकाल पूरा किया।

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