35 साल वालों को पीछे छोड़ 4 साल से सक्रिय को बनाया संगठन मंत्री

Political News – बैतूल – देश में कांग्रेस एक ऐसा राजनीतिक संगठन है जहां केंद्रीय स्तर से लेकर प्रदेश और प्रदेश से लेकर जिले और जिले से लेकर ग्राम स्तर तक कांग्रेस नेताओं में गुटीय राजनीति करना जैसे अनिवार्य हो गया है, लेकिन समय-समय पर यह गुट अपने राजनीतिक फायदे को लेकर कभी भी एक हो जाते हैं और फिर फायदा ना होने पर एक दूसरे के सामने खड़े होकर कांग्रेस की राजनीति करने लगते हैं |
ऐसा ही कुछ बैतूल में इन दिनों दिखाई दे रहा है। जिला कांग्रेस में संगठन में नियुक्तियों को लेकर जिले के दोनों गुट आमने सामने थे, लेकिन किसी नाम पर एक भी हो गए।
बैतूल जिला कांग्रेस अध्यक्ष के पद को लेकर कुछ दिनों पूर्व कांग्रेस में काफी घमासान हुआ, एक तरफ जहां हेमंत वागद्रेे को जिला कांग्रेस कमेटी का कार्यवाहक अध्यक्ष बनवाने में पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे को सफलता मिल गई थी। वहीं जिला कांग्रेस कमेटी के पिछले 5 वर्षों से अध्यक्ष सुनील शर्मा अपना अध्यक्ष पद बचाने में सफल रहे और हेमंत वागदरे को पूर्णकालिक जिला कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनने दिया।
लेकिन प्रदेश में आगामी विधान सभा चुनाव को देखते हुआ कांग्रेस में गुटीय समीकरण बैठाने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने जिला कांग्रेस कमेटी संगठन में दो अध्यक्ष नियुक्त कर दिए जिनमें सुनील शर्मा को पूरे जिले से जिला कांग्रेस शहर और हेमंत वागदरे को पूर्ण जिला कांग्रेस अध्यक्ष ना बनाते हुए जिला कांग्रेस ग्रामीण का अध्यक्ष बना दिया गया।
अब किसी तरह जिला कांग्रेस अध्यक्ष का मामला सुलझा तो फिर एक नया विवाद शुरू हो गया। कांग्रेस ने भाजपा की तर्ज पर अब जिला कांग्रेस कमेटी में संगठन मंत्री का पद इजाद किया है जो अध्यक्ष के बाद संगठन में सबसे पावरफुल रहेगा और इसी पद पर नियुक्ति को लेकर फिर एक बार कांग्रेस के दो गुट आमने-सामने हो गए थे।
ब्रज पांडे और हेमंत के नाम हुए थे प्रस्तावित | Political News

मिली जानकारी के अनुसार जिला कांग्रेस अध्यक्ष शहर सुनील शर्मा, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव रहे समीर खान एवं तीन कांग्रेस विधायक निलय डागा, ब्रह्मा भलावी एवं धरमु सिंह सिरसाम ने पिछले 35 वर्षों से कांग्रेस में काम कर रहे वरिष्ठ नेता ब्रज पांडे को संगठन मंत्री बनाने के लिए नाम प्रस्तावित किया था।
लेकिन यह भी जानकारी मिली है कि पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे एवं जिला कांग्रेस अध्यक्ष ग्रामीण हेमंत वागद्रे ने इस नाम पर अहसमिति जताते हुए कांग्रेस में ही छात्र राजनीति से अपनी राजनीति शुरू करने वाले कांग्रेस में लगभग 35 वर्षो से सक्रिय हेमंत पगारिया का नाम प्रस्तावित कर दिया। जिले मैं कांग्रेस की गुटिय राजनीति के विवाद के चलते इन दोनों नामों पर ग्रहण लग गया।
स्पेंसर लाल पर बनी सहमति | Political News

यह भी जानकारी मिली कि जब जिले में कांग्रेस संगठन मंत्री के पद को आम सहमति नहीं बनी तब प्रदेश कांग्रेस ने जिले के प्रमुख दो विधायक सुखदेव पांसे और निलय डागा को बुलाया और दोनों ने प्रदेश कांग्रेस द्वारा प्रस्तावित नाम स्पेंसर लाल को संगठन मंत्री बनाने पर सहमति दे दी। इस तरह से जिले में कांग्रेस की राजनीति में मात्र 4 वर्ष पूर्व सक्रिय हुए स्पेंसर लाल जिला कांग्रेस अध्यक्ष के बाद कांग्रेस में सबसे महत्वपूर्ण पद संगठन मंत्री के पद पर आसीन हो गए।
स्पेंसर लाल की दिल्ली से है डायरेक्ट सेटिंग | Political News
पाढर चिकित्सालय में चिकित्सीय सेवा में कार्यरत स्पेंसर लाल कि कांग्रेस की केंद्रीय राजनीति में डायरेक्ट सेटिंग बताई जा रही है तभी तो 35 साल से कांग्रेस में सक्रिय नेताओं को पीछे छोड़ कर 4 वर्ष पूर्व ही कांग्रेस की राजनीति में दिखने वाले स्पेंसर लाल अब जिला कांग्रेस के सबसे महत्वपूर्ण पदाधिकारी बन गए हैं। और अब कांगेसी यह मान रहे हैं कि स्पेंसर लाल जिला कांग्रेस के अगले अध्यक्ष होंगे।
क्योंकि अभी भी स्पेंसर लाल के पास जिले में कांग्रेस की सबसे अधिक जिम्मेदारियां हैं। श्रीलाल को हाल ही में एआईसीसी का सहयोजित मेंबर बनाया है जबकि जिले से सुखदेव पांसे और निलय डागा दो निर्वाचित आईसीसी के मेंबर हैं। इसके अलावा जिला संयोजक गांधी चौपाल भी है। और यह सभी पद श्रीलाल को 2 वर्ष में मिले हैं।






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