PMO : केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम बदल दिया है। सेंट्रल विस्टा के भीतर स्थित नया PMO कॉम्प्लेक्स अब “सेवातीर्थ” के नाम से जाना जाएगा। सरकार का मानना है कि यह नाम भारतीय संवैधानिक व्यवस्था की सेवा भावना और जनकल्याण के सिद्धांतों का प्रतिनिधित्व करता है।
पूरे देश में बदले जा रहे हैं सभी राजभवनों के नाम
सरकार की पहल केवल PMO तक सीमित नहीं है। पूरे देश में सभी राजभवनों के नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अब राज्यपालों के आवास को ‘राजभवन’ नहीं कहा जाएगा, बल्कि उन्हें ‘लोक भवन’ नाम दिया जा रहा है।
केंद्र द्वारा भेजे गए निर्देशों के आधार पर कई राज्यों ने इसे लागू भी कर दिया है।
किन राज्यों में अब तक लागू हो चुका है नया नाम?
अभी तक जिन राज्यों ने अपने राजभवनों का नाम बदला है, उनमें शामिल हैं—
- पश्चिम बंगाल (कोलकाता और दार्जिलिंग राजभवन)
- गुजरात
- तमिलनाडु
- त्रिपुरा
- केरल
- ओडिशा
- असम
- उत्तराखंड (देहरादून और नैनीताल)
इसके अलावा लद्दाख के उपराज्यपाल के आवास का नाम अब ‘लोक निवास’ कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह प्रक्रिया धीरे-धीरे सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों पर लागू कर दी जाएगी।
क्यों बदले जा रहे हैं राजभवनों के नाम?
केंद्र सरकार का कहना है कि ‘राजभवन’ शब्द में औपनिवेशिक मानसिकता झलकती है। अंग्रेज़ी शासन के दौरान बनाए गए इन नामों का अब भारतीय लोकतंत्र और जनता की भावना से मेल नहीं बैठता।
इसी वजह से—
- राज्यपाल के कार्यालय को जनता का भवन (लोक भवन)
- और उपराज्यपाल के आवास को लोक निवास
के रूप में पहचान देने का निर्णय लिया गया है।
सरकार का दावा है कि यह कदम “औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाने और भारतीय पहचान को सशक्त बनाने” की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
सेवातीर्थ नाम का क्या है महत्व?
‘सेवातीर्थ’ नाम का सीधा संबंध सेवा, समर्पण और जनहित से है।
सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री कार्यालय देश के हर नागरिक की सेवा का केंद्र है, इसलिए यह नाम भारतीय परंपरा और लोक-संस्कृति को और मजबूत बनाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि—
- यह बदलाव प्रशासनिक ढांचे में भारतीयता को बढ़ावा देगा,
- सरकारी संस्थानों में नई पहचान और नई सोच स्थापित करेगा,
- और आने वाली पीढ़ियों को संस्कृति से जोड़ने का काम करेगा।






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