PM नरेंद्र मोदी 1 फरवरी को पंजाब के जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्लां पहुंचेंगे। यहां वे संत निरंजन दास जी से आशीर्वाद लेंगे और सतगुरु रविदास जी महाराज की जयंती समारोह में शामिल होंगे। यह पहला मौका होगा जब पीएम मोदी काशी के बाहर किसी धार्मिक स्थल पर गुरु रविदास जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसी वजह से यह दौरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ राजनीतिक नजरिए से भी बेहद अहम माना जा रहा है।
पंजाब चुनाव से पहले क्यों अहम है यह विजिट
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह दौरा 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। पंजाब बीजेपी के लिए हमेशा से चुनौतीपूर्ण राज्य रहा है। पार्टी न तो यहां मजबूत संगठन खड़ा कर पाई है और न ही पीएम मोदी की लोकप्रियता अब तक निर्णायक वोट बैंक में बदली है। ऐसे में यह दौरा आने वाले चुनावों की जमीन तैयार करने की कोशिश माना जा रहा है।
दोआबा बेल्ट पर क्यों टिकी हैं सबकी नजरें
इस दौरे का सियासी फोकस दोआबा क्षेत्र पर है। पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से 23 सीटें दोआबा में आती हैं। खास बात यह है कि पंजाब में करीब 32 फीसदी वोटर दलित समुदाय से आते हैं और इनकी बड़ी आबादी दोआबा में रहती है। 2022 चुनाव में आम आदमी पार्टी को यहां पूरी तरह क्लीन स्वीप नहीं मिली थी, जिससे बीजेपी को यहां संभावनाएं नजर आ रही हैं।
डेरा सचखंड बल्लां का सामाजिक और राजनीतिक असर
डेरा सचखंड बल्लां रविदासिया समाज का सबसे बड़ा धार्मिक केंद्र माना जाता है। इसके करीब 20 लाख अनुयायी हैं, जो सिर्फ पंजाब ही नहीं बल्कि देश-विदेश में फैले हुए हैं। डेरा सीधे राजनीति में दखल नहीं देता, लेकिन बड़े नेताओं की मौजूदगी समाज को एक स्पष्ट संदेश जरूर देती है। माना जाता है कि इसी समुदाय के समर्थन से पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को जालंधर से मजबूती मिली थी।
दलित वोट बैंक और बीजेपी की नई चाल
बीजेपी शहरी इलाकों से बाहर पंजाब में अपनी पकड़ कमजोर मानती है, खासकर अकाली दल से अलग होने के बाद। हाल ही में कांग्रेस नेताओं के कुछ बयानों से दलित समाज में नाराजगी की चर्चा भी रही है। बीजेपी इसी असंतोष को भुनाने की कोशिश में है। पीएम मोदी का यह दौरा दलित समाज को सम्मान और भरोसे का संदेश देने के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या हो सकते हैं बड़े ऐलान
बीजेपी सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी इस दौरान कुछ अहम घोषणाएं कर सकते हैं। सबसे बड़ा संभावित ऐलान आदमपुर एयरपोर्ट का नाम गुरु रविदास जी महाराज के नाम पर रखने को लेकर हो सकता है। अगर ऐसा होता है, तो इसका सियासी असर दूर तक देखने को मिल सकता है।





