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PM मोदी और ट्रंप की फोन बातचीत क्यों बनी चर्चा का विषय

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भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ और ट्रेड डील को लेकर खींचतान जारी है। इसी बीच अमेरिका की ओर से एक चौंकाने वाला दावा सामने आया कि ट्रेड डील इसलिए पूरी नहीं हो पाई क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया। इस पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने साफ और दो टूक जवाब दिया। मंत्रालय ने कहा कि साल 2025 में PM मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच 8 बार फोन पर बातचीत हुई थी। इसके बाद लोगों के मन में सवाल उठने लगा कि आखिर दो देशों के बड़े नेता आपस में फोन पर बात कैसे करते हैं।

क्या आम कॉल की तरह होती है नेताओं की बातचीत

अक्सर लोग सोचते हैं कि जैसे हम-आप मोबाइल उठाकर कॉल कर लेते हैं, वैसे ही प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी बात कर लेते होंगे। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। दो देशों के शीर्ष नेताओं की फोन कॉल पूरी तरह प्रोटोकॉल, सुरक्षा और गोपनीयता के दायरे में होती है। इसमें कई स्तरों पर मंजूरी और तैयारी होती है, तभी जाकर बातचीत संभव हो पाती है।

फोन कॉल की शुरुआत कैसे होती है

अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात करना चाहते हैं, तो इसकी शुरुआत व्हाइट हाउस से होती है। व्हाइट हाउस पहले अमेरिका में स्थित भारतीय दूतावास को सूचना देता है। इसके बाद यह संदेश दिल्ली में विदेश मंत्रालय तक पहुंचता है। विदेश मंत्रालय फिर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से संपर्क करता है। दोनों नेताओं की सहमति और व्यस्तता को देखते हुए कॉल की तारीख और समय तय किया जाता है।

सुरक्षा और गोपनीयता का रखा जाता है पूरा ध्यान

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बीच होने वाली फोन बातचीत किसी आम कॉल की तरह नहीं होती। ये कॉल एन्क्रिप्टेड लाइन पर होती हैं, ताकि कोई तीसरा व्यक्ति बातचीत को सुन न सके। बातचीत के दौरान दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहते हैं, जो जरूरी बिंदुओं को नोट करते हैं। हर शब्द का महत्व होता है, इसलिए सुरक्षा और गोपनीयता में कोई समझौता नहीं किया जाता।

आपात स्थिति में कैसे होती है बातचीत

हालांकि आमतौर पर पूरा प्रोटोकॉल फॉलो किया जाता है, लेकिन आपात स्थिति में प्रक्रिया थोड़ी आसान हो जाती है। ऐसे समय में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA), विशेष दूत या वरिष्ठ अधिकारी आपस में सीधे संपर्क कर सकते हैं और जल्दी से फोन कॉल तय करवा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर बातचीत में अनुवादक भी शामिल होता है, ताकि भाषा की वजह से कोई गलतफहमी न हो।

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क्यों अहम होती हैं ऐसी फोन कॉल्स

PM मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप जैसी बातचीत सिर्फ औपचारिकता नहीं होती। इन कॉल्स में व्यापार, सुरक्षा, कूटनीति और वैश्विक मुद्दों पर बड़े फैसलों की नींव रखी जाती है। यही वजह है कि एक-एक कॉल का रिकॉर्ड और समय बेहद अहम माना जाता है। विदेश मंत्रालय का जवाब साफ दिखाता है कि भारत-अमेरिका संवाद लगातार बना हुआ है और फोन कॉल को लेकर फैलाए गए दावे पूरी तरह सही नहीं हैं।

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