कोठीबाजार की ऊंची सडक़ पर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे लोग, घर और दुकान वाले भी परेशान
बिना खोदे बनाई कोठीबाजार की व्हाइट टॉपिंग इसलिए हो गई 10 इंच ऊंची, गंज में बेस खोदकर किया जा रहा निर्माण
सांध्य दैनिक खबरवाणी, बैतूल
कोठीबाजार की निर्माणाधीन व्हाईट टॉपिंग सडक़ वहां के रहवासी और व्यापारियों के लिए दुखदायी साबित हो रही है। दरअसल इस सडक़ का निर्माण गलत तरीके से और गलत समय पर शुरू किया गया जिसके कारण लोगों के लिए यह सडक़ पूरी बनने के बाद भी मुसीबत ही साबित होगी और लंबे समय इसका टिक पाने की भी संभावना कम ही है।
दरअसल इस सडक़ का निर्माण बिना बेस की खुदाई किए कर दिया गया, जबकि व्हाईट टॉपिंक सडक़ निर्माण का नियम है कि पहले जो सडक़ बनी है चाहे वह डामर की हो या सीमेंट की उसे प्रॉपर तरीके से दो तीन फीट खुदाई करने के बाद बेस डाला जाता है इसके बाद व्हाईट टॉपिंग सडक़ का निर्माण किया जाता है। कोठीबाजार की इस तकनीकी त्रुटि को ठीक करते हुए गंज में बनाई जा रही सडक़ के लिए जरूर पहले खुदाई की जा रही है इसके बाद बेस डाला जाएगा उस बेस पर सडक़ बनेगी। कोठीबाजार की इस तकनीकी त्रुटि और सडक़ निर्माण में देरी का मामला अब कोर्ट भी पहुंच गया है। यहां नगरपालिका सडक़ निर्माण में देरी और तकनीकी खराबी का ठीकरा पीडब्ल्यूडी पर फोड़ रही है, जबकि सडक़ निर्माण की प्लानिंग के समय से ही इस मामले में ढिलाई बरतने के चलते यह सडक़ लोगों के लिए मुसीबत और परेशानियों का सबब बन गई है।
व्हाइट टॉपिंग सडक़ निर्माण की प्रक्रिया
तकनीकी सूत्र बताते हैं कि व्हाइट टॉपिंग सडक़ निर्माण में पुरानी सडक़ (आमतौर पर डामर) को हटाकर कांक्रीट की एक नई परत बिछाने से पहले खुदाई (यानी पुरानी सडक़ को हटाना) आवश्यक है, जिससे नीचे की सतह साफ और समतल हो जाती है। यह काम सडक़ को मजबूत और टिकाऊ बनाने के लिए किया जाता है, जिससे गड्ढे नहीं पड़ते और सडक़ की उम्र बढ़ जाती है।
पुरानी सडक़ को हटाना: व्हाइट टॉपिंग में कांक्रीट की नई परत डालने से पहले पुरानी डामर वाली सडक़ को पूरी तरह से हटा दिया जाता है। खुदाई करने से नीचे की सतह साफ होती है, जिस पर कांक्रीट की नई परत डाली जा सके। पुरानी सडक़ को हटाने और नई कांक्रीट परत बिछाने से सडक़ मजबूत और टिकाऊ बनती है, जो भारी यातायात और खराब मौसम का सामना कर सकती है।
इधर इस मामले में नगरपालिका सीएमओ सतीश सटसेनिया ने बताया कि व्हाईट टॉपिंग सडक़ निर्माण के लिए खुदाई नहीं की जाती है उसे सी बेस पर बनाया जाता है जो पहले से बना होता है, इससे सडक़ मजबूत बनती है। इधर गंज की सडक़ के मामले में उन्होंने बताया कि गंज की सडक़ व्हाईट टॉपिंग नहीं है यह सिंपल सीसी रोड है। इसलिए पहले इसका बेस खोदा जाता है इसके बाद सीमेंट सडक़ का निर्माण किया जाता है। बहरहाल जो भी हो लेकिन दोनों सडक़ों के मामले में उचित तरीके से गंज की सडक़ का निर्माण किया जा रहा है यदि व्हाईट टॉपिंग का निर्माण भी उचित खुदाई करके तकनीकी पहलुओं को फॉलो करते हुए बनाई जाती तो यह सडक़ सतह से 10 इंच ऊंची नहीं होती।
कोठीबाजार की ऊंची सडक़ पर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे लोग, घर और दुकान वाले भी परेशान बिना खोदे बनाई कोठीबाजार की व्हाइट टॉपिंग इसलिए हो गई 10 इंच ऊंची, गंज में बेस खोदकर किया जा रहा निर्माण
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