Osman Hadi Funeral: बांग्लादेश के युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद देश में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। उनके अंतिम संस्कार के बाद जो तस्वीरें और रिपोर्ट सामने आई हैं, उन्होंने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े चेहरे खुलेआम हिंसक प्रदर्शनों में शामिल दिख रहे हैं।
अंतिम संस्कार के बाद बेकाबू हुई भीड़
उसमन हादी को ढाका के संसद भवन के पास दफनाया गया। इसके बाद वहां मौजूद भीड़ अचानक उग्र हो गई और संसद की ओर बढ़ने लगी। हालात इतने बिगड़ गए कि भीड़ ने संसद परिसर के कुछ हिस्सों में तोड़फोड़ और लूटपाट तक कर डाली। चौंकाने वाली बात यह रही कि सेना मौके पर मौजूद होने के बावजूद भीड़ को पूरी तरह रोक नहीं सकी।
प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की खुली मौजूदगी
ढाका के शाहबाग इलाके में हुए प्रदर्शन में अंसारुल्लाह बांग्ला टीम जैसे प्रतिबंधित जिहादी संगठन से जुड़े नेताओं की मौजूदगी सामने आई। इनमें जमात से जुड़े कट्टरपंथी विचारक भी शामिल बताए जा रहे हैं। ये संगठन भारत और बांग्लादेश दोनों में प्रतिबंधित हैं, फिर भी खुलेआम भीड़ का नेतृत्व करते नजर आए।
सेना की अनदेखी, सिस्टम पर सवाल
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, बांग्लादेश की जनता अब सेना की बात सुनने को तैयार नहीं दिख रही। जब सुरक्षाबलों ने भीड़ को रोकने की कोशिश की तो लोगों ने उन्हें धक्का देकर आगे बढ़ना जारी रखा। इससे साफ है कि देश में प्रशासनिक नियंत्रण कमजोर पड़ चुका है और हालात हाथ से फिसलते नजर आ रहे हैं।
पूर्व भारतीय राजनयिकों की चेतावनी
पूर्व भारतीय राजनयिकों का मानना है कि बांग्लादेश में मौजूदा हालात का फायदा कट्टरपंथी और इस्लामी संगठन उठा रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उस्मान हादी के संबंध बांग्लादेश खिलाफत यूथ मजलिस जैसे संगठनों से रहे हैं, जो शरीयत कानून लागू करने की मांग करते हैं। ऐसे में हिंसा के पीछे संगठित साजिश की आशंका भी जताई जा रही है।
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सुरक्षा एजेंसियों का बयान और सरकार की अपील
हालांकि सुरक्षा एजेंसियों पर समय रहते कार्रवाई न करने के आरोप लगे हैं, लेकिन प्रशासन ने हिंसा की निंदा की है। ढाका के राजनयिक इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अंतरिम सरकार ने जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है और साफ कहा है कि अराजक तत्वों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।






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