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संगठित हिंदू समाज एवं पंच परिवर्तन समय की महती आवश्यकता – पंकज शर्मा
“”उत्साहपूर्ण वातावरण में भव्य हिंदू सम्मेलन का हुआ आयोजन,उमड़ा हिंदुओ का सैलाब””
भगवा पताकाओं से भगवामय हुआ गांव, प्रत्येक घर के सामने उकेरी गई रंगोली
आठनेर।संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त हिंदू आयोजन समिति मंडल आठनेर ग्रामीण के द्वारा ग्राम सावंगी में भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन रविवार को उत्साह और आस्था से परिपूर्ण वातावरण में आयोजित हुआ।सम्मेलन के अवसर पर पूरा गांव भगवा पताकाओं एवं प्रत्येक घर के सामने सुंदर रंगोली से सुसज्जित सुशोभित रहा।पूरे क्षेत्र का माहौल पूर्णतः सनातन संस्कृति के रंग में रंग गया।सबसे पहले प्रातः ग्राम के हनुमान मंदिर चौक से छत्रपति शिवाजी,भारतमाता की झांकी के साथ भव्य कलश शोभायात्रा मंगल गीतो,भजनों एवं उद्घोषों के साथ पूरे ग्राम में निकाली गई जिसका समापन कार्यक्रम स्थल पर किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।तत्पश्चात वंदेमातरम राष्ट्रीय गीत का सामूहिक गायन किया गया।ग्राम के वरिष्ठ कृष्णराव माकोड़े एवं श्रीमती कौसुबाई धोटे मंचासीन रहे। अतिथि परिचय एवं स्वागत के पश्चात हिंदू सम्मेलन में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत बौद्धिक शिक्षण प्रमुख पंकज शर्मा ने कहा कि हिंदू समाज को एकता,संस्कृति, परंपरा और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान सुनिश्चित करना चाहिए।उन्होंने कहा कि हिंदू समाज की पहचान उसकी संस्कृति,संस्कार और उसके मन बिंदुओं में निहित है,जिसे सुदृढ़ करना समय की आवश्यकता है।कलयुग में संगठन ही शक्ति है
अतः हमें जात-पात के भेदभाव को तोड़कर संगठित हिंदू समाज का निर्माण करना होगा। श्री शर्मा ने पंच परिवर्तन के विषय को विस्तार से रखा।इसके पश्चात भारत माता की सामूहिक आरती की गई।सम्मेलन के दौरान भगवा ध्वज,जयघोष और वन्देमातरम के नारों से वातावरण गूंज उठा।युवाओं,मातृशक्ति एवं बुजुर्गों की लगभग दो हजार की संख्या में उल्लेखनीय भागीदारी ने भव्य आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।बच्चों के द्वारा सुंदर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों दी गई। ओजस्वी उद्बोधन से उपस्थित जनसमूह में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार नजर आया।आयोजक समिति ने सभी का आभार प्रदर्शन करते हुए कहा कि इस प्रकार के सम्मेलन समाज में सांस्कृतिक चेतना को जागृत करते हैं।यह भव्य हिंदू सम्मेलन गांव के लिए ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण है।जिसने जनमानस में सांस्कृतिक स्वाभिमान और सामाजिक एकजुटता की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया है।कार्यक्रम का समापन उपस्थित जन समूह द्वारा एक पंगत पर सामूहिक समरसता भोज ग्रहण एवं हिंदू धर्म संस्कृति एवं संस्कार के संरक्षण करने के सामूहिक संकल्पके साथ किया गया।





