Search ई-पेपर ई-पेपर WhatsApp

ठेकेदार की लापरवाही पर अब अधिकारियों के बयान, अभिभावक बोले – जिम्मेदारी से भाग रहा विभाग

By
On:

ठेकेदार की लापरवाही पर अब अधिकारियों के बयान, अभिभावक बोले – जिम्मेदारी से भाग रहा विभागघोड़ाडोंगरी।

कन्या प्राथमिक शाला भवन (गुरु गोविंद सिंह वार्ड क्रमांक-02) की डिस्मेंटलिंग के दौरान ठेकेदार की लापरवाही से मासूम बच्चा घायल हो गया। इस हादसे ने प्रशासनिक लापरवाही और विभागीय उदासीनता को उजागर कर दिया है। अब जबकि अभिभावक गुस्से में हैं, विभागीय अधिकारियों के बेतुके बयान उनकी पीड़ा और बढ़ा रहे हैं।

कार्यपालन यंत्री का बयान बढ़ा आक्रोश

लोक निर्माण विभाग बैतूल की कार्यपालन यंत्री प्रीती पटेल ने हादसे के बाद कहा –
“एसडीओ से बात हुई है। उन्हें ठेकेदार से सफाई करने के लिए कह दिया गया है। डिस्मेंटलिंग वाली बिल्डिंग में कोई क्या कर रहा था, उसमें विभाग क्या कर सकता है। आप इस संबंध में एसडीओ से बात कर लीजिए।” पर एसडीओ द्वारा फोन को रिसीव नहीं किया गया जिससे बात नहीं हो पाई

अधिकारियों का यह बयान अभिभावकों को और ज्यादा आहत कर गया। सवाल यह उठ रहा है कि यदि विभाग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ेगा, तो फिर आदेशों के पालन और कार्य की निगरानी आखिर करेगा कौन?

अभिभावकों की नाराजगी

घायल बच्चे के पिता कुलदीप साहू ने कहा –
“मेरा बच्चा इसी स्कूल में पढ़ता है और घर भी बाजू में है। इसलिए बच्चा खेलने चला गया। वहां बाउंड्री तो है, लेकिन गेट नहीं है। 6 साल का बच्चा है, उसमें इतनी समझ नहीं होती। वहां और भी बच्चे खेलते हैं, किसी भी वक्त बड़ी दुर्घटना हो सकती है। अधिकारियों को तत्काल डिस्मेंटल का कचरा हटाना चाहिए। इस तरह के बयान देकर अपनी गलती छुपाई जा रही है। आदेशों की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो और मेरे बच्चे का इलाज प्रशासन की जिम्मेदारी है।”

आदेश की असलियत और अनदेखी
प्राप्त आदेशों के अनुसार कलेक्टर के आदेश में स्पष्ट उल्लेख था कि कार्यपालन यंत्री और जिला शिक्षा अधिकारी की मौजूदगी में भवन को पूरी तरह गिराकर स्थल को साफ किया जाए। इसके बाद लोक निर्माण विभाग ने बिल्डिंग को नीलम करके डिस्मेंटल के लिए ठेकेदार को सौंप दी थी
07 जुलाई 2025 को जारी पत्र (पृ. क्रमांक 1381/अ.वि.लि./24-25) में साफ निर्देश दिए गए थे कि –
“श्री दरियावसिंह परमार, उपयंत्री लो.नि.वि. अनुभाग शाहपुर के निर्देशन तथा उपस्थिति में नीलामी की शर्तानुसार उक्त भवनों को 7 दिवस के भीतर गिराकर सामग्री हटाकर खाली स्थल की सफाई की जाए। भवन गिराते समय किसी भी प्रकार की जन-धन हानि न हो, यह जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी। साथ ही नीलामी में शामिल भवनों के अलावा अन्य किसी भवन को क्षति न पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखा जाए।”

इन आदेशों को दरकिनार कर भवन अधूरा गिराकर मलबा वहीं छोड़ दिया गया। इसी मलबे के कारण बच्चे को चोट आई और हादसे की नौबत बनी।

जिम्मेदारी से भागता प्रशासन

अब जब हादसा हो चुका है, विभाग ठेकेदार और एसडीओ पर जिम्मेदारी डालकर खुद को बचाने में जुटा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर आदेश का पालन सही समय पर और पूरी तरह हुआ होता, तो मासूम बच्चे की जान पर संकट नहीं आता।

बड़ा सवाल

यह हादसा सिर्फ एक बच्चे के घायल होने का मामला नहीं है, बल्कि प्रशासन की खुली लापरवाही और जिम्मेदारी से भागने का जिंदा सबूत है। सवाल यही है कि –

आदेशों के बावजूद ठेकेदार को खुली छूट किसने दी?

निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी?

और कब तक विभाग इस तरह ठेकेदारों की गलती का ठीकरा मासूमों के सिर पर फोड़ता रहेगा?

For Feedback - feedback@example.com

233 thoughts on “ठेकेदार की लापरवाही पर अब अधिकारियों के बयान, अभिभावक बोले – जिम्मेदारी से भाग रहा विभाग”

Leave a Comment

Home Icon Home E-Paper Icon E-Paper Facebook Icon Facebook Google News Icon Google News