ईरान में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। खबरें आ रही हैं कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहा है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी सेना की ओर से संभावित हमलों की पूरी जानकारी दी गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या वाकई अमेरिका ईरान पर हमला करने जा रहा है।
अमेरिकी सेना ने तैयार किए सैन्य विकल्प
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन ने ट्रंप के सामने ‘लिमिटेड एयरस्ट्राइक’ जैसे विकल्प रखे हैं। इनमें ईरान की सुरक्षा एजेंसियों के ठिकानों और रणनीतिक जगहों पर सर्जिकल स्ट्राइक की योजना शामिल है। हालांकि, अभी तक किसी भी अंतिम कार्रवाई को हरी झंडी नहीं मिली है। ट्रंप ने साफ किया है कि अगर हमला हुआ भी तो उसमें अमेरिकी जमीनी सैनिक शामिल नहीं होंगे।
ट्रंप की खुली चेतावनी से बढ़ी हलचल
डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान के लोग आज़ादी चाहते हैं और अमेरिका उनका समर्थन करने के लिए तैयार है। इससे पहले भी ट्रंप ने कहा था कि ईरान “बड़ी मुसीबत” में है और अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका वहां जोरदार हमला करेगा। हालांकि, उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि हालात और न बिगड़ें।
इजरायल भी हाई अलर्ट पर
अमेरिका की संभावित कार्रवाई को देखते हुए इजरायल भी सतर्क हो गया है। रॉयटर्स के अनुसार, इजरायल के वरिष्ठ अधिकारी मान रहे हैं कि अमेरिका किसी भी समय कदम उठा सकता है। इसी सिलसिले में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच बातचीत भी हुई है। पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव अब पूरी दुनिया की चिंता बन चुका है।
ईरान में हालात बेकाबू, इंटरनेट बंद
ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुए प्रदर्शन अब पूरे देश में फैल चुके हैं। आर्थिक बदहाली के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन अब सरकार विरोधी रूप ले चुका है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि पूरे देश में इंटरनेट बंद कर दिया गया है। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक अब तक कम से कम 72 लोगों की मौत हो चुकी है और 2300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है।
प्रदर्शनकारियों पर सख्ती और मौत की धमकी
ईरान सरकार ने प्रदर्शनकारियों को ‘मोहरब’ यानी ईश्वर का दुश्मन करार दिया है। यह ईरानी कानून में गंभीर अपराध माना जाता है, जिसकी सजा मौत है। सरकारी टीवी तक ने यह चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों की मदद करने वालों पर भी सख्त कार्रवाई होगी। इसके बावजूद लोग सड़कों पर उतर रहे हैं और कई जगहों पर ईरान के पूर्व शाह के समर्थन में नारे लग रहे हैं।
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विदेशों में भी गूंजा ईरान का आंदोलन
ईरान के हालात का असर अब विदेशों में भी दिखने लगा है। लंदन में एक प्रदर्शनकारी ने ईरानी दूतावास पर चढ़कर झंडा बदल दिया। पेरिस, बर्लिन और वॉशिंगटन में भी ईरान विरोधी प्रदर्शन हुए। कुल मिलाकर, ईरान संकट अब सिर्फ एक देश का मामला नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक तनाव का बड़ा कारण बनता जा रहा है।





