भारतीय सेना लगातार अपनी ताकत बढ़ाने की दिशा में नए और घातक हथियार शामिल कर रही है। अब सेना को ऐसा हथियार मिलने वाला है, जो दुनिया की किसी भी दूसरी सेना के पास अभी तक नहीं है। हम बात कर रहे हैं रामजेट इंजन से चलने वाले 155 मिमी आर्टिलरी गोले की, जो दुश्मन के ठिकानों पर कहर बरपा सकते हैं। इस देसी तकनीक से भारत की सैन्य क्षमता को नई ऊंचाई मिलने वाली है।
आत्मनिर्भर भारत की बड़ी कामयाबी
रामजेट इंजन से लैस इन खास गोले को आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत तैयार किया गया है। इसे आईआईटी मद्रास और भारतीय सेना ने मिलकर विकसित किया है। हाल ही में राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में इसके शुरुआती परीक्षण पूरे किए गए हैं। यह उपलब्धि देश के लिए गर्व की बात है, क्योंकि यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है।
तोपखाने की मारक क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी
अब तक भारतीय तोपखाना अधिकतम 40 से 45 किलोमीटर तक ही निशाना साध पाता था। लेकिन रामजेट इंजन वाले इन गोलों के आने से यह दूरी करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी। यानी अब तोपें भी मिसाइल जैसी सटीकता और मारक क्षमता के साथ दुश्मन को जवाब दे सकेंगी। इससे युद्ध के मैदान में सेना को बड़ा फायदा मिलेगा।
कैसे काम करता है रामजेट इंजन वाला गोला
रामजेट इंजन हवा से ऑक्सीजन लेकर लगातार थ्रस्ट पैदा करता है। इसमें किसी टर्बाइन या कंप्रेसर की जरूरत नहीं होती। जैसे ही गोला तोप से दागा जाता है और उसकी रफ्तार मैक 2 के आसपास पहुंचती है, इंजन सक्रिय हो जाता है। हवा दबती है, ईंधन जलता है और गोला मिसाइल की तरह आगे बढ़ता रहता है। इसी वजह से यह 100 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकता है।
आतंकियों के ठिकानों पर सीधा वार
इन रामजेट गोले को एम 777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर जैसी आधुनिक तोपों से भी दागा जा सकता है। भारतीय सेना के पास मौजूद ज्यादातर गन सिस्टम इसके अनुकूल हैं। इसका मतलब यह है कि अब आतंकियों के ठिकानों को तबाह करने के लिए अलग से मिसाइल या ड्रोन की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक गोला ही काफी होगा।
अभी विकास के अंतिम दौर में तकनीक
हालांकि इन गोलों के परीक्षण सफल रहे हैं, लेकिन अभी यह सिस्टम पूरी तरह सेना को सौंपा नहीं गया है। कुछ तकनीकी कमियों को दूर करने और इसे और बेहतर बनाने का काम जारी है। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होगी, भारतीय सेना की मारक ताकत कई गुना बढ़ जाएगी और दुश्मनों की नींद उड़ना तय है।





