Sanatan Dharma में दान को सर्वोत्तम कर्म माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि सच्चे मन से किया गया दान न केवल कष्टों को दूर करता है बल्कि बड़े से बड़े पाप भी खत्म कर देता है। खासकर धार्मिक ग्रंथ, पुराण और स्तोत्रों का दान करने से ग्रहदोष शांत होते हैं, नकारात्मक ऊर्जा मिटती है और देवताओं की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
आज के कालचक्र (12 दिसंबर 2025) में प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय बता रहे हैं कि हफ्ते के किन दिनों में कौन-सा ग्रंथ दान करना शुभ माना जाता है।
रविवार: सूर्य कृपा और नौकरी में सफलता का वरदान
रविवार के दिन हरिवंश पुराण की पुस्तक खरीदकर मंदिर में दान करना श्रेष्ठ माना जाता है।
साथ ही:
- सूर्य देव के 21 नामों का जाप
- आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ
- पक्षियों और जानवरों के लिए पानी की व्यवस्था
इन उपायों से सूर्य दोष शांत होता है, आंखों, सिरदर्द और बुखार जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। यह उपाय खासतौर पर उन लोगों के लिए शुभ है जिनकी सरकारी या प्राइवेट नौकरी में अड़चनें आ रही हों।
सोमवार: शत्रु शांत और धनहानि से मुक्ति
अगर जीवन में विरोधी बढ़ रहे हों या बार-बार धन का नुकसान हो रहा हो, तो सोमवार के दिन शिव चालीसा, शिव पुराण या शिव रक्षा स्तोत्र दान करें।
इसके साथ:
- महादेव मंदिर में बैठकर शिव अष्टोत्तर नामावली
- पाशुपत स्तोत्र, शिव तांडव या पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ
- सफेद कपड़े में मिश्री बांधकर बहते जल में प्रवाहित करें
इस उपाय से शत्रु भय दूर होता है, धनहानि रुकती है और पेट संबंधी परेशानियाँ भी कम होती हैं।
मंगलवार: चोरी, हानि और भय से मुक्ति
अगर घर में बार-बार चोरी हो रही हो या कीमती सामान गुम हो रहा हो तो मंगलवार को हनुमान चालीसा की पुस्तक हनुमान मंदिर में दान करें।
साथ में:
- रोज हनुमान चालीसा
- सुंदरकांड या बजरंग बाण का पाठ
- कुत्तों को तंदूर की रोटी खिलाएँ
इससे ग्रह बाधाएँ शांत होती हैं, अकस्मात मृत्यु का भय दूर होता है और वैवाहिक जीवन में भी शांति आती है।
धार्मिक ग्रंथ दान के क्या लाभ?
- ग्रहदोष शांत होते हैं
- नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है
- भाग्य उज्ज्वल होता है
- मन में शांति और आत्मबल बढ़ता है
- देवी-देवताओं की विशेष कृपा मिलती है
पंडित सुरेश पांडेय क्या कहते हैं?
पंडित जी के अनुसार, सही दिन पर किया गया सही ग्रंथ दान जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। यह सिर्फ धार्मिक उपाय नहीं, बल्कि मन, ग्रह और ऊर्जा—तीनों को संतुलित करने का एक आध्यात्मिक तरीका है।





