ईरान और United States के बीच हुए सीजफायर को लेकर Pakistan खुद को ‘शांति दूत’ बता रहा था। लेकिन अब सच्चाई सामने आ गई है—पाकिस्तान कोई बड़ा खिलाड़ी नहीं, बल्कि सिर्फ “बिचौलिया” निकला। “दिखावा बड़ा, काम छोटा” वाली बात हो गई
फाइनेंशियल टाइम्स का खुलासा – US ने किया इस्तेमाल
ब्रिटिश अखबार Financial Times की रिपोर्ट में साफ कहा गया कि अमेरिका ने पाकिस्तान को सिर्फ मैसेज पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया। Donald Trump प्रशासन चाहता था कि ईरान तक बात एक मुस्लिम पड़ोसी देश के जरिए पहुंचे, इसलिए पाकिस्तान को चुना गया। “काम करवाया, क्रेडिट लेने दिया”
शहबाज शरीफ और असिम मुनीर की असली भूमिका
Shehbaz Sharif ने सबसे पहले सीजफायर का ऐलान किया, लेकिन असली बातचीत Asim Munir और अमेरिकी नेताओं के बीच चल रही थी। सोशल मीडिया पर उनका “Draft वाला पोस्ट” वायरल होना भी इस बात का सबूत बना कि कहानी कुछ और थी। “कॉपी-पेस्ट की पोल खुल गई”
जयशंकर का बयान हुआ सही साबित
भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar पहले ही कह चुके थे कि भारत कभी “ब्रोकर डिप्लोमेसी” नहीं करता। अब उनकी बात बिल्कुल सही साबित हुई। “भारत सीधे खेलता है, घुमा-फिरा कर नहीं”
Read Also:मिडिल ईस्ट संकट के बीच बड़ा फैसला: 5KG गैस सिलेंडर की सप्लाई होगी दोगुनी
सीजफायर के बाद भी टेंशन खत्म नहीं
Iran अभी भी नाराज है और अगर हालात नहीं सुधरे तो Strait of Hormuz को फिर से बंद करने की धमकी दे चुका है। इससे पूरी दुनिया में तेल संकट गहरा सकता है। “मामला अभी ठंडा नहीं, बस थोड़ा रुका है”





