28 फरवरी 2026 को मिडिल ईस्ट की स्थिति सिर्फ तनावपूर्ण नहीं बल्कि खौफनाक मोड़ पर पहुंच गई। इज़राइल और अमेरिका द्वारा चलाए गए “ऑपरेशन रोरिंग लायन” के बाद ईरान ने ऐसा जवाब दिया कि पूरी दुनिया दहल उठी। खाड़ी क्षेत्र में मिसाइलों की गूंज सुनाई दी और हालात बेकाबू होते नजर आए।
एक साथ कई देशों पर मिसाइल हमला
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने पड़ोसी देशों जैसे संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कतर में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइलें दागीं। इन देशों में अमेरिका के बड़े एयरबेस और नौसैनिक ठिकाने हैं।
धमाकों की आवाज दुबई और मनामा के आसपास सुनी गई। हालांकि कई मिसाइलों को पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही मार गिराया, लेकिन हमले से दहशत का माहौल बन गया।
ट्रंप की “गारंटी” पर सीधा वार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी देशों को सुरक्षा का भरोसा दिया था। लेकिन ईरान के इस पलटवार को ट्रंप की साख और प्रतिष्ठा पर बड़ा झटका माना जा रहा है।
ईरान पहले ही साफ कर चुका था कि अगर उसकी जमीन पर हमला हुआ तो वह उन देशों को भी नहीं छोड़ेगा जो अमेरिका को पनाह देंगे। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि यह लड़ाई दो देशों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले रही है।
चाबहार से लेकर खाड़ी तक तनाव
ईरान के चाबहार शहर पर हमले के बाद वहां हालात बेहद गंभीर बताए जा रहे हैं। इसी बीच इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि जब तक ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं होता, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे।
ईरान की ओर से भी बयान आया है कि यह जंग सीमाओं में बंधी नहीं रहेगी और इसका जवाब लंबा और कड़ा होगा। ऐसे में पूरे मिडिल ईस्ट में अफरा-तफरी मची हुई है।
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क्या मिडिल ईस्ट राख में बदलेगा?
निवेशक और पर्यटक दोनों घबराए हुए हैं। खाड़ी देशों के बाजारों में गिरावट और एयर ट्रैफिक में बाधा की खबरें सामने आ रही हैं। जानकारों का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही बिगड़ते रहे तो यह टकराव बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है।
फिलहाल दुनिया की नजर मिडिल ईस्ट पर टिकी है। सवाल यही है कि क्या कूटनीति से हल निकलेगा या फिर यह आग पूरे इलाके को अपनी लपटों में ले लेगी।




