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ट्रंप के फैसले से बदला खेल, सैम ऑल्टमैन ने लपका बड़ा डील

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अमेरिका की टेक और राजनीति की दुनिया में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सख्त फैसले के बाद ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने ऐसा दांव चला कि उनकी कंपनी को बड़ा सरकारी कॉन्ट्रैक्ट मिल गया। अब ओपनएआई के एआई टूल्स अमेरिकी रक्षा विभाग में इस्तेमाल किए जाएंगे।

ट्रंप आखिर एंथ्रोपिक से नाराज क्यों हुए?

एआई कंपनी Anthropic ने साफ कहा था कि वह अपने एआई सिस्टम को पूरी तरह से ऑटोनॉमस हथियारों या बड़े पैमाने की निगरानी में इस्तेमाल करने के पक्ष में नहीं है। कंपनी का कहना था कि उनके एआई मॉडल में सेफ्टी लिमिट्स पहले से तय हैं और उन्हें हटाया नहीं जा सकता।

यही बात ट्रंप को नागवार गुजरी। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी सेना पर दबाव बना रही है और इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसके बाद ट्रंप ने सरकारी एजेंसियों को एंथ्रोपिक की तकनीक इस्तेमाल करने से रोक दिया।

सरकारी बैन के बाद क्या हुआ?

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट कर साफ शब्दों में लिखा कि सरकार को एंथ्रोपिक की जरूरत नहीं है और भविष्य में कोई बिजनेस नहीं होगा। इसके बाद अमेरिकी रक्षा विभाग ने भी कंपनी को सप्लाई-चेन रिस्क मानते हुए नए डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट्स पर रोक लगा दी।

इस फैसले ने टेक इंडस्ट्री में हलचल मचा दी और एआई कंपनियों के लिए नए समीकरण बना दिए।

सैम ऑल्टमैन ने कैसे मारी बाजी?

मौका देखते ही OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने अमेरिकी रक्षा विभाग से समझौता पक्का कर लिया। अब ओपनएआई का चर्चित एआई मॉडल ChatGPT सख्त नियमों के तहत रक्षा से जुड़े कामों में इस्तेमाल होगा।

ऑल्टमैन ने साफ किया कि किसी भी ऑटोनॉमस हथियार से जुड़ा अंतिम फैसला इंसानों के हाथ में रहेगा। यानी एआई सिर्फ मदद करेगा, आखिरी बटन इंसान ही दबाएगा। कंपनी अपने इंजीनियरों को भी डिपार्टमेंट ऑफ वॉर में तैनात करेगी ताकि सिस्टम की निगरानी हो सके।

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एआई और युद्ध: आगे क्या?

यह डील दिखाती है कि एआई अब सिर्फ चैटिंग या कंटेंट बनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रक्षा और युद्ध रणनीति में भी एंट्री कर चुका है। हालांकि सेफ्टी और एथिक्स को लेकर बहस जारी है।

एक तरफ सरकार का कहना है कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी, वहीं कुछ टेक कंपनियां मानती हैं कि एआई को हथियारों से दूर रखना चाहिए। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि एआई और सैन्य ताकत का यह गठजोड़ दुनिया की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।

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