अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट जल्द ही डोनाल्ड ट्रंप सरकार द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ पर बड़ा फैसला सुना सकती है। अगर कोर्ट ने इन टैरिफ को असंवैधानिक करार दिया, तो इसका असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत जैसे देशों पर भी पड़ेगा, जिन पर 50 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाया जा चुका है।
ट्रंप के लिए क्यों अहम है सुप्रीम कोर्ट का फैसला
डोनाल्ड ट्रंप ने ये टैरिफ राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर लगाए थे। उन्होंने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट यानी IEEPA के तहत खुद को यह अधिकार दिया था। ट्रंप का कहना है कि इन टैरिफ से अमेरिका को भारी राजस्व मिल रहा है और अगर कोर्ट ने इन्हें रद्द किया तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगेगा।
ट्रंप प्रशासन की वैकल्पिक रणनीति क्या होगी
ट्रंप के करीबी सहयोगी और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में साफ कर दिया है कि अगर सुप्रीम कोर्ट टैरिफ हटाने का आदेश देती है, तो सरकार अगले ही दिन नए टैरिफ लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर देगी। यानी कोर्ट के फैसले के बावजूद प्रशासन पीछे हटने के मूड में नहीं है।
नए टैरिफ लागू करने में क्या दिक्कतें आएंगी
ग्रीर के मुताबिक अगर पुराने टैरिफ रद्द होते हैं, तो उनकी भरपाई करना बेहद मुश्किल होगा। यह तय करना कि कितना पैसा किस देश को, कब और कैसे लौटाया जाए, इसमें सालों लग सकते हैं। यही वजह है कि प्रशासन कानूनी रास्तों से नए नियम लाकर टैरिफ दोबारा लागू करने की कोशिश करेगा।
भारत और दूसरे देशों पर क्या असर पड़ेगा
अगर अमेरिका नए टैरिफ लागू करता है, तो भारत जैसे देशों के निर्यात पर सीधा असर पड़ेगा। पहले से ही कई भारतीय उत्पादों पर भारी शुल्क लगाया जा चुका है। इससे भारत अमेरिका व्यापार संबंधों में तनाव बढ़ सकता है और वैश्विक बाजार में अस्थिरता आ सकती है।
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राष्ट्रपति की ताकत पर सुप्रीम कोर्ट की परीक्षा
यह मामला सिर्फ टैरिफ का नहीं है, बल्कि राष्ट्रपति की शक्तियों की सीमा का भी है। अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के फैसले को खारिज करती है, तो यह भविष्य में किसी भी राष्ट्रपति के लिए एक बड़ा उदाहरण बन सकता है। इससे यह तय होगा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर राष्ट्रपति कितनी दूर तक फैसले ले सकता है।





