खबरवाणी
2200 बोरी मूंग अपग्रेडिंग पर नए सवाल
सामने आया वीडियो–पंचनामा में कंकर–मिट्टी; फिरदिखी पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड ही नहीं
घोड़ाडोंगरी ।रानीपुर। गायत्री वेयरहाउस की 2200 बोरी मूंग अपग्रेडिंग का मामला एक बार फिर चर्चा में।
मीडिया को भेजे गए वीडियो में मूंग में कंकर–मिट्टी साफ दिखी।
कर्मचारी कहते सुनाई दिए — “अभी भी कंकर निकल रहे हैं…साहब पंखा जैसा है, वैसा ही काम कर रहा है।”
वीडियो ने अपग्रेडिंग की गुणवत्ता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया।
संस्था प्रबंधक का बयान—डीएमओ ने ही वीडियो पंचनामा भेजने के लिए कहा
संस्था प्रबंधक परसराम वर्मा का ने बताया कि
डीएमओ ने वीडियो और पंचनामा भेजने को कहा था।
अपग्रेडिंग तीन दिन चली।
डीएमओ सर आखिरी दिन पहुंचे।
इसी आखिरी दिन ‘अपग्रेडिंग पूर्ण’ का पंचनामा बना।
सवाल—पूरी प्रक्रिया देखे बिना पूर्णता का प्रमाण कैसे?
पूरी 2200 बोरी का वीडियो नहीं, सिर्फ कुछ क्लिप
अपग्रेडिंग की पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं।
सिर्फ चुनिंदा वीडियो भेजे गए।
पूरे तीन दिन का क्रमवार वीडियो नहीं।
न रिकॉर्ड, न पारदर्शिता—प्रक्रिया पर संदेह गहरा।
जिन पर आरोप थे, वही पंचनामा में गवाह
अमानक खरीदी में जिन कर्मचारियों पर सवाल थे,
उन्हीं की मौजूदगी में अपग्रेडिंग कराई गई।
पंचनामा में साइन भी उन्हीं कर्मचारियों के।
“जिनसे जवाब मांगना था, वही गवाह कैसे?
95 लाख रुपये का मुद्दा और प्रशासन की चुप्पी
अमानक मूंग का मूल्य लगभग 95 लाख रुपये।
इसी भारी राशि की भरपाई के डर से उच्च स्तरीय जांच नहीं बनी।
जिले के अधिकारियों की चुप्पी लगातार सवालों में।
लोगों की व्यंग्यात्मक टिप्पणी—
“मूंग पर तो पंखा चला… लेकिन जांच पर पंखा क्यों बंद?”
विवादित वेयरहाउस में ही धान खरीदी शुरू
2200 बोरी मूंग का सच अभी भी साफ नहीं।
अपग्रेडिंग पर सवाल कायम।
पंचनामा विवादित।
फिर भी उसी वेयरहाउस में धान खरीदी शुरू।
800–900 किसानों का पंजीयन बताया गया।
किसानों का सवाल—
“जहां मूंग सुरक्षित नहीं, वहां धान कैसे सुरक्षित?”
किसानों और नागरिकों की मुख्य मांगें
स्वतंत्र जांच टीम बने।
पूरी अपग्रेडिंग प्रक्रिया का वीडियो सार्वजनिक किया जाए।
विवादित कर्मचारियों को प्रक्रिया से अलग किया जाए।
95 लाख रुपये की जवाबदेही तय हो।
प्रशासन अपनी चुप्पी तोड़े।





