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बदलता भारत: इन्वेस्टमेंट में युवाओं और महिलाओं का दबदबा, 5 साल में दोगुनी हुई भागीदारी!

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बेंगलूरु की साइबर सिटी में एक अमेरिकी मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत 28 वर्षीय अभिषेक सेंसेक्स के उछाल के साथ अपने निवेश की रकम डेढ़ गुना होने से उत्साहित हैं। उनकी पत्नी मनीषा, जो उसी कंपनी में काम करती हैं, के साथ वे अंडमान घूमने की योजना बना रहे हैं। इस दंपती ने डेढ़ लाख रुपये के टूर पैकेज की तलाश शुरू की है, क्योंकि इस माह उन्हें इन्वेस्टमेंट से इतना ही लाभ हुआ है। अभिषेक उन लाखों युवाओं में से एक हैं, जिन्होंने कोविड काल के बाद नियमित आय और निवेश से मिले लाभ के जरिए जीवन को आनंदमय बनाने का मंत्र अपनाया है।

युवाओं में निवेश का रुझान

आज की युवा पीढ़ी, खासकर इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, मैनेजर और व्यापारी, जल्दी निवेश की ओर आकर्षित हो रहे हैं। शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड और अन्य विविध निवेश विकल्प उनकी प्राथमिकता हैं।

> देश में 40% डीमैट खाताधारक 30 साल से कम उम्र के हैं।

> 15 करोड़ सक्रिय निवेशकों में 6 करोड़ से अधिक युवा हैं।

कम उम्र में निवेश शुरू

अभिषेक और मनीषा ने 22 साल की उम्र में नौकरी शुरू करते ही निवेश शुरू कर दिया था। बचपन में अपने पिता की आर्थिक मुश्किलें और माता-पिता के स्वास्थ्य खर्च देखकर वे बीमा पॉलिसी और रिटायरमेंट फंड के प्रति जागरूक हैं। साथ ही, वे निवेश से नियमित आय के जरिए जीवन को आकर्षक बनाना चाहते हैं। हालांकि, जल्दी और ज्यादा कमाई के चक्कर में कुछ युवा धोखाधड़ी का शिकार भी हो रहे हैं।

पर्यटन और लाइफस्टाइल पर बढ़ता खर्च

युवा पीढ़ी निवेश के साथ-साथ खर्च करने में भी पीछे नहीं है। उनकी प्राथमिकताएं हैं:

पर्यटन: कोविड के बाद ट्रैवलिंग और धार्मिक पर्यटन का क्रेज बढ़ा है।

लाइफस्टाइल: गैजेट्स, ब्रांडेड कपड़े और पैकेज्ड फूड पर खर्च।

सर्वे में हुआ खुलासा

एक सर्वे के अनुसार, 14-28 साल के युवाओं ने उपभोक्ता व्यय में 43% की वृद्धि की है। अनुमान है कि 2035 तक भारत का कुल उपभोक्ता खर्च 328 लाख करोड़ रुपये होगा, जिसमें युवाओं का योगदान 51% (168 लाख करोड़ रुपये) होगा।

युवा जल्दी निवेश क्यों कर रहे हैं?

पारिवारिक जिम्मेदारियों का अभाव: एकल परिवार और माता-पिता का घर होने से मकान की चिंता नहीं।

उच्च आय: नौकरी की शुरुआत में माता-पिता से बेहतर पैकेज।

तकनीकी सुविधा: आइटी ने निवेश को आसान और जागरूकता बढ़ाई।

आर्थिक अनुभव: बचपन में देखी आर्थिक तंगी।

FOMO (Fear of Missing Out): कमाई के अवसर चूकने का डर।

निवेश में सावधानी

शॉर्टकट से बचें: जल्दी कमाई के भ्रामक ऑफर से सावधान रहें।

फर्जी सलाहकारों से सतर्कता: केवल मान्यता प्राप्त सलाहकारों पर भरोसा करें।

विविध निवेश: जोखिम कम करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करें।

आपातकालीन और रिटायरमेंट फंड: भविष्य की सुरक्षा के लिए अलग फंड रखें।

अध्ययन और कानून: निवेश से पहले जानकारी लें और नियमों का पालन करें।

महिलाओं में निवेश की बढ़ती सजगता

निवेश के प्रति जागरूकता केवल कामकाजी युवा महिलाओं तक सीमित नहीं है। गृहणियां भी शेयर मार्केट, सोना-चांदी के भाव, और म्यूचुअल फंड की चर्चा किट्टी पार्टियों में करती हैं। आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं। मार्च 2025 तक 78.4 करोड़ पैन कार्ड में 33.97 करोड़ महिलाओं के हैं, जिनमें 9.44 करोड़ 30 साल से कम उम्र की महिलाएं हैं। म्यूचुअल फंड निवेशकों में 25% महिलाएं हैं। म्यूचुअल फंड की कुल प्रबंधनीय संपत्ति (AUM) में महिलाओं की हिस्सेदारी 33% से अधिक है।

महिलाओं के पैन कार्ड और डीमैट खातों की वृद्धि

वर्ष पैन कार्ड (करोड़) डीमैट कार्ड (करोड़)
2019 16.17 0.67
2023 27.24 2.72
2024 31.05 2.77
2025 33.97 3.05

म्यूचुअल फंड में महिलाओं का निवेश

वर्ष राशि (लाख करोड़ रुपये) हिस्सेदारी (%)
2019 4.59 8.8
2014 11.25 21.3
2025 22.96 33

निवेश में सकारात्मक बदलाव

आज की युवा पीढ़ी निवेश और खर्च के संतुलन से जीवन को आनंदमय बना रही है। अभिषेक और मनीषा जैसे युवा न केवल आर्थिक रूप से जागरूक हैं, बल्कि अपने भविष्य को सुरक्षित करने के साथ-साथ वर्तमान को भी जी रहे हैं। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी निवेश के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव का संकेत है। हालांकि, धोखाधड़ी से बचने और विवेकपूर्ण निवेश के लिए सतर्कता जरूरी है।

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