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आलमगंज में कैरी बैग बनाने वाली सामग्री पर नगर निगम की कार्रवाई
फैक्टरी पर छापा, करीब 6 क्विंटल 80 किलो सामग्री जप्त; 15 हजार रुपए का चालान
बुरहानपुर। प्रतिबंधित प्लास्टिक कैरी बैग के निर्माण और उपयोग को लेकर नगर निगम की टीम ने कार्रवाई करते हुए आलमगंज क्षेत्र स्थित एक फैक्टरी पर छापा मारा। नगर निगम के अमले ने यहां से कैरी बैग बनाने में उपयोग होने वाली करीब 6 क्विंटल 80 किलो सामग्री जप्त किए जाने की जानकारी दी है। कार्रवाई सुबह करीब 10 बजे से 11 बजे के बीच की गई।
नगर निगम की टीम द्वारा की गई इस कार्रवाई से क्षेत्र में प्लास्टिक कैरी बैग के निर्माण और भंडारण को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। निगम अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई के दौरान फैक्टरी में मौजूद कैरी बैग बनाने वाली सामग्री को जब्त किया गया। मामले में संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ 15 हजार रुपए का चालान बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।
एक घंटे तक चली कार्रवाई
जानकारी के अनुसार नगर निगम की टीम सुबह करीब 10 बजे आलमगंज स्थित संबंधित फैक्टरी पहुंची। टीम ने मौके पर जांच की और कैरी बैग निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को कार्रवाई के दायरे में लिया। करीब एक घंटे तक चली कार्रवाई के दौरान सामग्री की जांच और जप्ती की प्रक्रिया पूरी की गई।
नगर निगम द्वारा की गई जप्ती का वजन करीब 6 क्विंटल 80 किलो बताया गया है। हालांकि, जप्त सामग्री की प्रकृति, उसकी निर्धारित मानकों के अनुरूपता और प्रतिबंधित प्लास्टिक संबंधी नियमों के तहत उसकी स्थिति का अंतिम निर्धारण संबंधित विभागीय रिकॉर्ड और जांच के आधार पर ही होगा।
15 हजार रुपए का चालान
कार्रवाई के दौरान नगर निगम द्वारा संबंधित फैक्टरी के खिलाफ 15 हजार रुपए का चालान बनाए जाने की जानकारी दी गई है। अब यह महत्वपूर्ण होगा कि विभागीय रिकॉर्ड में कार्रवाई किस नियम और प्रावधान के तहत दर्ज की गई है तथा आगे की प्रक्रिया क्या अपनाई जाती है।
प्लास्टिक कैरी बैग को लेकर केंद्र और राज्य स्तर पर समय-समय पर नियम और प्रतिबंध लागू किए गए हैं। ऐसे में किसी भी प्रतिष्ठान द्वारा प्लास्टिक सामग्री का निर्माण, भंडारण अथवा विक्रय नियमों के विपरीत पाया जाता है तो संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
पहले सिंधी बस्ती में भी हुई थी कार्रवाई
यह पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी नगर निगम की टीम द्वारा सिंधी बस्ती क्षेत्र में प्रतिबंधित प्लास्टिक कैरी बैग और डिस्पोजेबल सामग्री को लेकर कार्रवाई की गई थी। उस कार्रवाई में भी दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में रखी प्लास्टिक सामग्री की जांच की गई थी।
लगातार हो रही कार्रवाई के बावजूद शहर में प्लास्टिक कैरी बैग की उपलब्धता और उसके इस्तेमाल को लेकर सवाल बने हुए हैं। ऐसे में केवल दुकानों पर कार्रवाई करने के बजाय निर्माण और थोक स्तर पर होने वाली आपूर्ति की भी नियमित जांच किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
निर्माण से लेकर बिक्री तक निगरानी की जरूरत
प्लास्टिक कैरी बैग पर नियंत्रण के लिए केवल बाजार में दुकानदारों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। यदि प्रतिबंधित या नियमों के विपरीत सामग्री का निर्माण अथवा थोक आपूर्ति कहीं से हो रही है, तो संबंधित विभाग को नियमानुसार उसकी भी जांच करनी होगी।
आलमगंज की कार्रवाई के बाद अब यह सवाल भी सामने है कि जप्त की गई 6 क्विंटल 80 किलो सामग्री कहां से लाई गई थी, उसका उपयोग किस प्रकार किया जाना था और क्या संबंधित फैक्टरी के पास निर्माण एवं संचालन से जुड़े आवश्यक दस्तावेज और अनुमतियां थीं। इन सभी बिंदुओं की पुष्टि विभागीय जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही हो सकती है।
नियमों के पालन की अपील
नगर निगम द्वारा की जा रही कार्रवाई के बीच शहर के व्यापारियों से प्लास्टिक संबंधी लागू नियमों का पालन करने की अपील की जानी चाहिए। दुकानदारों और प्रतिष्ठान संचालकों को प्रतिबंधित सामग्री का भंडारण या उपयोग करने से बचना चाहिए तथा निर्धारित वैकल्पिक सामग्री का उपयोग करना चाहिए।
वहीं, नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। बाजार में सामान खरीदते समय प्रतिबंधित प्लास्टिक कैरी बैग लेने से बचना और कपड़े अथवा अन्य पर्यावरण-अनुकूल थैलों का उपयोग करना प्लास्टिक कचरे को कम करने में मदद कर सकता है।
आगे भी जांच की आवश्यकता
आलमगंज में हुई कार्रवाई के बाद अब निगाह इस बात पर रहेगी कि नगर निगम और संबंधित विभाग आगे भी प्लास्टिक निर्माण एवं थोक भंडारण वाले स्थानों पर इसी तरह जांच जारी रखते हैं या नहीं। यदि शहर में प्रतिबंधित प्लास्टिक की आपूर्ति की कोई श्रृंखला सामने आती है तो नियमानुसार उसके प्रत्येक स्तर की जांच की जा सकती है।
फिलहाल आलमगंज की कार्रवाई में करीब 6 क्विंटल 80 किलो कैरी बैग बनाने वाली सामग्री जप्त किए जाने और 15 हजार रुपए का चालान बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। कार्रवाई से जुड़े अन्य तथ्य विभागीय रिकॉर्ड और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।






