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Munga Ki Kheti – मुनगा की खेती से बर्बाद हुए किसान

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आशा उपवंशी के खिलाफ कृषि मंत्री को की शिकायत

Munga Ki Khetiबैतूल काजू और मुनगा को लेकर चर्चित रही उद्यान विभाग की प्रभारी उपसंचालक डॉ. आशा उपवंशी के कार्यों से आज भी किसान परेशान है। किसानों को सब्जबाग दिखाकर उन्हें मुनगा की खेती करने के लिए प्रेरित किया गया और एक कंपनी से किसानों का अनुबंध कराकर मुनगा की खेती कराई गई।

इस कंपनी ने बैतूल के किसानों के साथ छलावा किया है। पहले उन्हें बताया गया था कि किसानों से मुनगा की पत्ती खरीदी जाएगी। लेकिन जब कई किसानों के खेत में मुनगा की खेती असफल हो गई तो कंपनी बैतूल से रफू चक्कर हो गई। अब एक नया मामला सामने आया है। जिसमें मुनगा की खेती सफल होने के बाद वे किसान परेशान हैं उनकी पत्ती खरीदने वाला कोई नहीं है। इसको लेकर कुछ किसानों ने कृषि मंत्री कमल पटेल को शिकायत की है।

97 किसानों के साथ हुआ था अनुबंध | Munga Ki Kheti

कृषक रामा पिता जगलाल, सुरेश पिता रामा और नरेंद्र पिता रामा ने कृषि मंत्री कमल पटेल को शिकायत की है जिसमें बताया है कि इंदौर की फर्जी कंपनी के साथ 97 किसानों का तत्कालिन प्रभारी उपसंचालक डॉ. आशा उपवंशी ने अनुबंध कराया था। अनुबंध के बाद किसानों को पौधे दिए गए थे लेकिन अधिकांश किसानों के खेत में पौधे लगाने के कुछ दिनों बाद ही ये पौधे मर गए।

जब इसकी शिकायत विभाग को की गई तो विभाग के अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए। बताए गए पते पर कंपनी भी नहीं मिली। जिसके बाद किसानों का पैसा डूब गया और पैसे की वापसी के लिए किसानों ने कई बार शिकायत भी की। शिकायतकर्ता किसानों का कहना है कि अनुबंध में मुनगा के पौधे लगाने और पत्ती खरीदने के लिए कंपनी ने सहमति दी थी।

इन तीनों किसानों के खेत में 24 हजार पेड़ जीवित है। और 5 साल से कोई फसल नहीं ले रहे हैं। जिससे किसानों को बड़ा नुकसान हुआ है और कंपनी भी आज तक उनकी पत्ती खरीदने नहीं आई है। किसानों ने सभी 97 किसानों से लिए गए पैसे वापस दिलाने और डॉ. आशा उपवंशी के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की है।

चल रही है विभागीय जांच | Munga Ki Kheti

उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा बैतूल की तत्कालिन प्रभारी उपसंचालक डॉ. आशा उपवंशी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की है। सहायक संचालक उद्यान ने 27 जुलाई को डॉ.केएस किराड़ अपर संचालक उद्यान को पत्र लिखकर डॉ. आशा उपवंशी के खिलाफ विभागीय जांच करने का लिखा था।

यह जांच तीन माह में पूर्ण कर प्रतिवेदन विभाग को भेजा जाना था। 27 अक्टूबर को इस जांच की समय अवधि खत्म हो जाएगी। गौरतलब है कि जब डॉ. आशा उपवंशी बैतूल की प्रभारी उपसंचालक थी उस समय विभाग की कई योजनाओं में गड़बड़ी के आरोप लगे थे और शिकायतें भी की गई थीं। जिसमें काजू, मनुगा और तोतापरी आम का भी मामला शामिल था।

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