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मध्य प्रदेश में एक्सोटिक जानवरों की तस्करी रोकने सख्त नियम लागू,हर छह महीने में मेडिकल रिपोर्ट अनिवार्य

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मध्य प्रदेश में वन विभाग ने एक्सोटिक जानवरों की तस्करी रोकने के लिए नए और सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब हर पालतू या व्यापार में शामिल एक्सोटिक जानवर की मेडिकल रिपोर्ट और ब्रीडिंग की जानकारी छह महीने में एक बार जमा करनी होगी। हर वन मंडल को साल में दो बार विस्तृत रिपोर्ट बनाकर भोपाल स्थित मुख्यालय भेजनी होगी। यह जिम्मेदारी हर रेंज को दी गई है ताकि किसी भी तरह की अवैध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई हो सके। विभाग का मानना है कि यह व्यवस्था नवंबर से लागू हो चुकी है और इसका मकसद अवैध तस्करी पर पूरा रोक लगाना है।

केंद्र सरकार ने 2020 में मैकॉ, अफ्रीकन पैरट, टुराको, कैपो-डव, विदेशी कछुए, इगुआना, और एक्सोटिक नस्ल के कुत्तों सहित कई विदेशी प्रजातियों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन शुरू किया था। इसके लिए पर्यावरण मंत्रालय के परिवेश पोर्टल पर जानकारी अपलोड करना जरूरी है।
अगर कोई व्यक्ति ऐसा जानवर खरीदता, बेचता या पालता है, तो उसे यह बताना होता है कि जानवर कहाँ से लाया गया, कितने में खरीदा और किसे बेचा गया। इसके साथ ही जानवर की सेहत और ब्रीडिंग की जानकारी भी अपलोड करनी होती है। 2022 में संशोधित वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अब एक्सोटिक जानवर रखने और ब्रीडिंग करने के लिए लाइसेंस भी अनिवार्य कर दिया गया है।

गलत जानकारी पर होगी कार्रवाई

परिवेश पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की फीस 1000 रुपए रखी गई है। किसी पालतू एक्सोटिक जानवर के बच्चे होने पर सात दिन के भीतर जानकारी अपलोड करना जरूरी है। जानवर की बिक्री या दान की जानकारी भी पोर्टल पर डालना अनिवार्य है। यदि कोई गलत सूचना देता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इससे जानवरों की सुरक्षा और अवैध बाजार पर नियंत्रण सुनिश्चित किया जाएगा।

निरीक्षण प्रक्रिया में मिली ढिलाई

नियमों के अनुसार हर साल वन विभाग को रजिस्टर्ड जानवरों का निरीक्षण करके पोर्टल पर अपडेट करना होता है, लेकिन कई जगह यह प्रक्रिया गंभीरता से नहीं की जा रही थी। अब वरिष्ठ अधिकारियों ने निर्देश जारी कर दिए हैं कि हर रजिस्टर्ड एक्सोटिक जानवर की वेटरनरी हेल्थ रिपोर्ट अनिवार्य रूप से जमा की जाए। इसके लिए पंजीकृत जानवरों की मेडिकल जांच पशु चिकित्सकों द्वारा करवाई जाएगी।

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वेटरनरी डॉक्टरों की मदद से होगी पूरी प्रक्रिया

इंदौर वन मंडल के डीएफओ प्रदीप मिश्रा ने बताया कि हर रेंज को अपने क्षेत्र में रजिस्टर्ड जानवरों की पहचान, सत्यापन और मेडिकल सर्टिफिकेट तैयार करने होंगे। इसके बाद संपूर्ण रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जाएगी। नया सिस्टम लागू होने से एक्सोटिक जानवरों की तस्करी, अवैध कारोबार और गलत जानकारी देने वालों पर कड़ा नियंत्रण किया जा सकेगा।

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