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Moong Ki Kheti – नए साल में इस तरीके से करें मूंग की खेती होगा अच्छा मुनाफा 

यहाँ जाने कब और कैसे करें, और पूरा विवरण 

Moong Ki Khetiआज हम आपको बताएँगे कि मूंग की खेती कब करनी चाहिए, मूंग की बुआई के लिए सही समय क्या है, इसकी फसल अवधि क्या है, कौन-कौन सी मिट्टियों में इसे उगाया जा सकता है, और इसमें कौन-कौन सी उन्नत किस्में होती हैं। मूंग की खेती में खाद और उर्वरक का प्रबंधन कैसे करना चाहिए, सिंचाई कैसे करनी चाहिए, और इसमें कौन-कौन से रोग हो सकते हैं उनका नियंत्रण कैसे करना चाहिए?

दो सीजन में कर सकते हैं खेती | Moong Ki Kheti 

मूंग की खेती आप दो सीजनों में कर सकते हैं – पहला खरीफ में और दूसरा जायद में। खरीफ में इसकी बुआई करने के लिए, आप 1 जुलाई से 31 जुलाई तक का समय चुन सकते हैं। और यदि आप जायद में इसकी खेती कर रहे हैं, तो आप 1 फरवरी से 31 मार्च तक इसकी बुआई कर सकते हैं।

फसल की अवधि 

इस फसल की पूर्णावधि 60 से 80 दिनों की होती है। इसके लिए, बुआई से लेकर कटाई तक, तापमान की आवश्यकता 20 से 35 डिग्री सेल्सियस तक होती है।

सही मिटटी की पहचान | Moong Ki Kheti 

इस फसल की खेती हम मुख्य रूप से दोमट मिटटी, बुलेई दोमट मिटटी, काली मिटटी, पिली मिटटी, हलकी चिकनी मिटटी, हल्की रेतीली मिटटी में कर सकते हैं। साथ ही, मिटटी में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा होनी चाहिए और उस मिटटी का pH मान 5 से 7 के बीच होना चाहिए, और बुआई के 15 दिन पहले आपको मिटटी की जुताई कर लेनी चाहिए।

यदि आप जायद में बुआई कर रहे हैं तो 1 एकड़ में 20 से 25 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है, और खरीफ में 10 से 15 किलोग्राम प्रति एकड़।

मूंग की वैरायटी 

बाजार में मूंग के कई प्रकार हैं, जैसे कि सम्राट (PDM 139 मूंग), IPM 410-3 (सिखा मूंग), विराट मूंग, विशाल मूंग, जवाहर मूंग, MH 421 मूंग, आदि।

बुवाई करने की प्रक्रिया | Moong Ki Kheti 

मूंग की बुआई को हम छिटकाव विधि, देसी हल के द्वारा या सीड ड्रिल मशीन के माध्यम से कर सकते हैं। खाद की बात करें तो जब आपकी फसल 20 से 25 दिन की हो जाती है, तब आप उस समय यूरिया का उपयोग कर सकते हैं, और यूरिया का इस्तेमाल 20 से 30 किलोग्राम प्रति एकड़ में कर सकते हैं, इसके साथ ही आपको ह्यूमिक एसिड का भी उपयोग करना होगा। इसके बाद, जब आप स्प्रे कर रहे हैं, तो 19:19:19 की 600 से 800 ग्राम प्रति एकड़ में छिड़काव करें। जब पौधे फूलने लगें, तब बायो पोटास का भी उपयोग करें।

सिंचाई का समय 

आप मूंग की खेतों में 3 से 4 बार सिंचाई कर सकते हैं, क्योंकि मूंग को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन जब पौधे फूल पर होते हैं, तो आपको विशेष ध्यान देना चाहिए कि आपके खेत में नमी बनी रहे।

Source – Internet   
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