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छत्तीसगढ़ में मानसून का असर रहेगा तेज, अगले कुछ दिन भारी पड़ेंगे

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रायपुर: उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और ओडिशा तट पर सक्रिय निम्न दाब क्षेत्र के असर से प्रदेश में अगले दो दिनों तक बारिश का दौर तेज रहने वाला है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश के दक्षिण और मध्य हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना है।

आज प्रदेश में होगी झमाझम
मौसम विभाग ने बताया कि गुरुवार को प्रदेश के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश अथवा गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। इसके साथ ही एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ वज्रपात और भारी से अति भारी बारिश की भी संभावना जताई गई है। भारी बारिश का मुख्य क्षेत्र मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ रहने की आशंका है।

पिछले 24 घंटे में बस्तर तरबतर
पिछले 24 घंटों के दौरान बस्तर संभाग के कई स्थानों पर भारी से अति भारी बारिश दर्ज की गई। सुकमा में कुछ स्थानों पर सीमांत भारी बारिश हुई। वहीं दुर्ग संभाग में भी एक-दो जगहों पर तेज बारिश हुई। सुकमा में 210, बास्तानार में 200, लोहांडीगुड़ा में 190, दरभा में 170, गीदम में 160, कोंटा में 160, नानगुर में 150, बड़े बचेली में 150, गादीरास में 150, कटेकल्याण में 150, तोकापाल में 130, छोटेडोंगर में120, दंतेवाड़ा में 110, पाटन में 100, कुआकोंडा में 100 मिमी बारिश हुई।

तापमान का हाल
प्रदेश में अधिकतम तापमान 33.0 डिग्री सेल्सियस बिलासपुर में दर्ज हुआ। न्यूनतम तापमान 20.5 डिग्री सेल्सियस राजनांदगांव में रहा। रायपुर में मंगलवार को अधिकतम तापमान 32.9 और न्यूनतम 22.5 डिग्री दर्ज किया गया। 28 अगस्त को अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश, एक-दो जगहों पर भारी से अति भारी बारिश।

29 अगस्त को दक्षिण छत्तीसगढ़ में जोरदार बारिश, उत्तर और मध्य क्षेत्रों में बौछारें पड़ने की संभावना है। इसके बाद बारिश में कमी आने की संभावना है। गुरुवार को रायपुर शहर में एक-दो बार गरज-चमक के साथ बौछारें गिर सकती हैं। अधिकतम तापमान करीब 34 डिग्री और न्यूनतम 25 डिग्री रहने का अनुमान है।

बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दाब क्षेत्र
ओडिशा तट से सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दाब क्षेत्र ऊपरी हवा के चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण के साथ 7.6 किलोमीटर ऊंचाई तक सक्रिय है। यह सिस्टम धीरे-धीरे पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है। वहीं, मानसून द्रोणिका बीकानेर, बनस्थली, दमोह, पेण्ड्रारोड से होते हुए इस निम्न दाब केंद्र तक और आगे दक्षिण-पूर्व की ओर मध्य बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है।

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