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Maithili Thakur Result: आखिर अलीनगर ने मैथिली ठाकुर को ही क्यों चुना MLA

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Maithili Thakur Result: अलीनगर विधानसभा ने इस बार एक नया चेहरा चुना है और वो भी रिकॉर्ड वोटों से। बीजेपी की उम्मीदवार और मशहूर लोकगायिका मैथिली ठाकुर ने 84915 वोटों के साथ जीत हासिल की। पार्टी में आने के सिर्फ 15 दिन बाद टिकट मिलना और फिर सीधे जनता से इतनी बड़ी स्वीकृति मिलना, यह अपने आप में बड़ी बात है। आखिर ऐसा क्या था जिसने अलीनगर के लोगों को पुराने दावेदारों के बजाय मैथिली के समर्थन में खड़ा कर दिया। आइए उन अहम कारणों को समझते हैं।

गांव गांव में सांस्कृतिक पहचान की लहर

राजनीति में आने से पहले ही मैथिली ठाकुर गांवों में घर-घर पहचानी जाती थीं। उनके लोकगीत और मधुर आवाज ने उन्हें खास बनाया। अलीनगर के ग्रामीण इलाकों में उनकी लोकप्रियता पहले से ही मजबूत थी, जो चुनाव में उनके लिए वरदान साबित हुई। गांव का हर परिवार उनके गीतों से जुड़ा हुआ महसूस करता है।

सोशल मीडिया की धमक और डिजिटल पहुंच

मैथिली की ऑनलाइन फैन फॉलोइंग किसी बड़े सेलिब्रिटी से कम नहीं। इंस्टाग्राम पर 63 लाख और यूट्यूब पर 51 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर उनके प्रभाव को दिखाते हैं। उनकी reels, लोकगीत और डिजिटल कैंपेन ने युवाओं और पहली बार वोट करने वाले मतदाताओं पर गहरा असर डाला। एक जाना-पहचाना चेहरा चुनाव में हमेशा बढ़त दिलाता है और मैथिली को यही फायदा मिला।

युवा मतदाताओं की पहली पसंद

अलीनगर का युवा वर्ग मैथिली ठाकुर को अपने जैसा मानता है। उनकी मेहनत, सरल भाषा और अपनेपन ने युवाओं में विश्वास पैदा किया। युवा वोटरों ने माना कि एक पढ़ी-लिखी और आधुनिक सोच वाली उम्मीदवार ही उनके क्षेत्र को आगे ले जा सकती है। यही कारण है कि युवाओं की बड़ी संख्या मैथिली के साथ खड़ी दिखी।

महिलाओं का भरोसा और समर्थन

अलीनगर में इस बार महिला मतदाताओं ने निर्णायक भूमिका निभाई। मैदान में अधिकतर उम्मीदवार पुरुष थे और मैथिली ठाकुर एकमात्र बड़ी महिला उम्मीदवार के रूप में सामने थीं। महिलाओं ने महसूस किया कि मैथिली उनकी समस्याओं को बेहतर समझेंगी। उनकी विनम्रता, परिवारिक छवि और सहज व्यवहार ने महिलाओं का दिल जीत लिया।

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लोकगीत और जमीन से जुड़ाव ने किया कमाल

चुनावी सभाओं में मैथिली द्वारा गाए गए मैथिली और मिथिला क्षेत्र के लोकगीतों ने ग्रामीण जनता में अपनापन पैदा किया। उनकी आवाज, स्थानीय संस्कृति से जुड़ाव और लोगों के बीच उनकी सहज मौजूदगी ने माहौल को पूरी तरह उनके पक्ष में कर दिया। लोकगायिका से नेता बनी मैथिली ने अपनी कला को प्रचार का मजबूत हथियार बनाया और जनता ने इसे दिल से स्वीकार किया।

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