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Maharashtra Mahayuti criris: महायुती में बढ़ती दरार: महाराष्ट्र की सियासत में फिर बढ़ा तनाव

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Maharashtra Mahayuti criris: महाराष्ट्र की राजनीति इन दिनों महायुती गठबंधन के भीतर गहराती खींचतान के कारण बेहद गर्म हो गई है। बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच तनातनी खुलकर सामने आ रही है। मलवण में शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक निलेश राणे की छापेमारी का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब सांगोला में पूर्व विधायक शाहजी बापू पाटिल के दफ्तर पर चुनाव आयोग और लोकल क्राइम ब्रांच (LCB) की संयुक्त टीम ने देर रात छापा मार दिया।

शाहजी बापू पाटिल के दफ्तर पर देर रात छापा

रविवार देर रात करीब 10 बजे शुरू हुई यह कार्रवाई सोमवार सुबह तक चलती रही। टीम ने सिर्फ पाटिल के दफ्तर पर ही नहीं बल्कि उनके करीबी रफीक नादाब के घर पर भी छापेमारी की। प्रशासन ने अभी तक छापे में मिली चीज़ों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है। स्थानीय राजनीतिक हलकों में इस कार्रवाई को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं गर्म हैं।

सांगोला में पांच दफ्तरों पर एक साथ रेड

चुनाव आयोग और पुलिस की संयुक्त टीम ने सांगोला में पांच राजनीतिक दफ्तरों पर एक साथ कार्रवाई की। इनमें बीजेपी, एनसीपी, शेठकारी कामगार पार्टी और नगर विकास फ्रंट के कार्यालय शामिल थे। शाहजी बापू पाटिल के दफ्तर पर हुई छापेमारी ने शिंदे गुट के नेताओं में बेचैनी बढ़ा दी है, क्योंकि यह कार्रवाई डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस की जनसभा के कुछ ही घंटे बाद हुई।

“छापेमारी को ज्यादा गंभीर न लें”: शिंदे का बयान

इस पूरी राजनीतिक हलचल के बीच महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रमुख एकनाथ शिंदे ने बयान दिया कि शाहजी बापू पाटिल के दफ्तर पर छापा “कोई गंभीर मामला नहीं” है। उन्होंने कहा कि जांच नियमानुसार होगी और इसका राजनीतिक रंग नहीं देना चाहिए।
गौरतलब है कि चार दिन पहले ही शिवसेना के हिंगोली विधायक संतोष बंगार के घर पर भी पुलिस टीम ने दबिश दी थी।

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बीजेपी से नाराज़ शाहजी बापू पाटिल, राजनीति छोड़ने का संकेत

सांगोला नगरपालिका चुनाव में बीजेपी ने शिंदे गुट को दरकिनार कर सभी दलों के साथ गठबंधन कर लिया है। इससे नाराज़ शाहजी बापू पाटिल ने इस गठजोड़ को “बेहद गंदी राजनीति” और “बेबस इंसान के साथ बलात्कार जैसा कृत्य” बताया था।
छापेमारी के बाद उनका गुस्सा और बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि इतने चुनाव लड़ने के बाद भी उन्होंने कभी इस तरह का माहौल नहीं देखा। पाटिल ने इशारा किया कि अगर राजनीति ऐसे ही “गलत दिशा” में जाती रही, तो वे राजनीति छोड़ने पर भी गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

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