खबरवाणी
भौंरा में तेंदुए का रेस्क्यू,
तीन माह की दहशत का अंत
पिपरिया से छोड़ा गया किशोर तेंदुआ नहीं हो पाया सेट, हाथियों से नीचे उतारकर गन से किया गया बेहोश
भौंरा । भौंरा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बीते तीन माह से दहशत का कारण बने तेंदुए को सोमवार को सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया गया। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की विशेष टीम ने हाथियों की मदद से पहाड़ी क्षेत्र में ऑपरेशन चलाते हुए तेंदुए को ट्रैंकुलाइज गन से इंजेक्शन देकर सुरक्षित रूप से पकड़ लिया। रेस्क्यू के साथ ही क्षेत्र में लंबे समय से व्याप्त भय का माहौल समाप्त हो गया है।
किशोर तेंदुआ, पिपरिया से छोड़ा गया था
सहायक संचालक विनोद वर्मा ने बताया कि रेस्क्यू किया गया तेंदुआ अभी किशोर अवस्था का है। उन्होंने बताया यह तेंदुआ कुछ समय पहले पिपरिया क्षेत्र में पकड़ा गया था। उसे बाद में रिजर्व क्षेत्र में छोड़ा गया, लेकिन कम उम्र होने के कारण वह वहां खुद को अनुकूल नहीं कर सका और आबादी वाले इलाकों की ओर निकल आया। भौंरा, धपाड़ा सहित आसपास के कई ग्रामीण क्षेत्रों में यह करीब तीन माह से विचरण कर रहा था।
पिंजरों से बचता रहा, हाथियों से उतारकर किया काबू
विनोद वर्मा ने बताया कि तेंदुए को पकड़ने के लिए कई बार पिंजरे लगाए गए, लेकिन उसकी चतुराई के चलते वह उनमें नहीं फंसा।अंततः सोमवार को हाथियों पर सवार होकर टीम ने तेंदुए को पहाड़ी क्षेत्र से नीचे की ओर खदेड़ा। सुरक्षित दूरी बनने पर ट्रैंकुलाइज गन से इंजेक्शन देकर उसे बेहोश किया गया और रेस्क्यू किया गया।
वन विहार भेजा जाएगा, जंगल में नहीं छोड़ा जाएगा
वन अधिकारियों के अनुसार, इस तेंदुए को दोबारा रिजर्व फॉरेस्ट में नहीं छोड़ा जाएगा। उसकी उम्र और व्यवहार को देखते हुए उसे वन विहार भेजा जा रहा है, जहां विशेषज्ञों की निगरानी में उसे रखा जाएगा।
डॉक्टरों की टीम और पूरा अमला रहा मौजूद
इस रेस्क्यू ऑपरेशन में चिकित्सकों की विशेष टीम, भौंरा वन परिक्षेत्र का पूरा स्टाफ, STR की विशेष रेस्क्यू टीम तथा चार हाथियों का दल शामिल रहा। ऑपरेशन के दौरान मेडिकल स्टाफ लगातार अलर्ट पर रहा ताकि तेंदुए और कर्मियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
मासूम पर हमले के बाद तेज हुआ था अभियान
गौरतलब है कि बीते शुक्रवार को ढाई वर्षीय बालक पर तेंदुए के हमले के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश और भय फैल गया था। इसके बाद रेस्क्यू अभियान को उच्च स्तर पर तेज किया गया और अंततः सोमवार को सफलता मिली। तेंदुए के रेस्क्यू के बाद भौंरा और आसपास के गांवों में सामान्य स्थिति लौटने की उम्मीद जगी है। ग्रामीणों ने राहत महसूस करते हुए प्रशासन और वन विभाग से भविष्य में ऐसे हालात दोबारा न बनने देने की ठोस व्यवस्था की मांग की है।
भौंरा में यह रेस्क्यू अभियान न केवल तीन माह की दहशत का अंत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि वन्यजीव प्रबंधन में समय पर समन्वित कार्रवाई कितनी निर्णायक साबित हो सकती है।






