Leh Ladakh News: लद्दाख में हाल ही में हुई हिंसा के बाद वहां की स्थिति लगातार चर्चा में है। शनिवार को लेह एपेक्स बॉडी (LAB) ने केंद्र सरकार द्वारा घोषित न्यायिक जांच का स्वागत किया, लेकिन साथ ही आयोग में लद्दाख के प्रतिनिधि को शामिल करने की मांग भी रखी। वहीं, लोगों ने प्रशासन के रवैये के खिलाफ ब्लैकआउट प्रदर्शन किया।
हिंसक झड़पों की जांच के लिए केंद्र ने बनाई न्यायिक समिति
केंद्र सरकार ने लेह में 24 सितंबर को हुई हिंसक झड़पों की जांच के लिए सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज बी.एस. चौहान की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग का गठन किया है। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें एक कारगिल युद्ध के पूर्व सैनिक भी शामिल थे। गृहमंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, आयोग कानून-व्यवस्था बिगड़ने के हालात, पुलिस कार्रवाई और मृतकों की परिस्थितियों की जांच करेगा।
LAB ने उठाए सवाल, कहा – लद्दाख का कोई प्रतिनिधि नहीं
लेह एपेक्स बॉडी के सह-अध्यक्ष और लद्दाख बौद्ध संघ के प्रमुख चेयरिंग दोरजे लाकरूक ने कहा कि, “हम इस जांच आयोग का स्वागत करते हैं, लेकिन इसमें कुछ कमियां हैं। आयोग में लद्दाख से कोई सदस्य नहीं है और एफआईआर नंबर 144 का संदर्भ यह दर्शाता है कि जांच का रुख हमारे लोगों की ओर है।” उन्होंने कहा कि जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।
शांतिपूर्ण मार्च रोके जाने पर नाराजगी
LAB ने उपराज्यपाल प्रशासन पर आरोप लगाया कि उन्होंने शांतिपूर्ण मौन मार्च को रोककर जनता की आवाज दबाने की कोशिश की। लाकरूक ने कहा, “ऐसे कदम कभी भी सकारात्मक परिणाम नहीं देंगे और न ही इससे संवाद बहाल हो पाएगा। यह लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है।”
लद्दाख में ब्लैकआउट से दर्ज हुआ विरोध
शनिवार शाम 6 बजे से लद्दाख में ब्लैकआउट देखा गया। लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के आह्वान पर लोगों ने अपने घरों की लाइटें बंद कर दीं। यह कदम प्रशासन और केंद्र के प्रति असंतोष जताने के लिए उठाया गया। लोगों का कहना है कि लद्दाख की आवाज को अनदेखा किया जा रहा है और इस ब्लैकआउट के जरिए उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया।
लद्दाख के लोगों की मांग – निष्पक्ष जांच और समान भागीदारी
लद्दाख के लोगों की मांग है कि आयोग में स्थानीय प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए ताकि सच सामने आ सके। LAB का कहना है कि यह जांच केवल तभी सफल मानी जाएगी जब यह राजनीतिक दबाव से मुक्त और पारदर्शी तरीके से पूरी की जाए। वहीं, लोगों का विश्वास तभी बहाल होगा जब सरकार लद्दाख की जनता को न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम उठाएगी।






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