Leech Therapy Kya Hoti Hai: जोंक थेरेपी को आयुर्वेद में जलौका चिकित्सा कहा जाता है। इसमें एक खास तरह की जोंक का इस्तेमाल किया जाता है, जो शरीर से दूषित या खराब खून को बाहर निकालती है। आयुर्वेदाचार्य मानते हैं कि कई बीमारियों की जड़ गंदा खून होता है, और जब वही बाहर निकल जाता है तो शरीर खुद को ठीक करने लगता है। यह थेरेपी सदियों से इस्तेमाल होती आ रही है।
जोंक थेरेपी कैसे की जाती है?
इस थेरेपी में जोंक को शरीर के प्रभावित हिस्से पर लगाया जाता है। जोंक त्वचा से चिपककर धीरे-धीरे खून चूसती है। आमतौर पर इसे 15 से 20 मिनट तक लगाया जाता है। जब जोंक पूरी तरह भर जाती है, तो वह खुद ही अलग हो जाती है या विशेषज्ञ उसे हटा देते हैं। माना जाता है कि इस प्रक्रिया से सूजन और दर्द में राहत मिलती है।
किन बीमारियों में जोंक थेरेपी फायदेमंद मानी जाती है?
विशेषज्ञों के अनुसार जोंक थेरेपी कई समस्याओं में सहायक हो सकती है, जैसे –
जोड़ों का दर्द और गठिया,
त्वचा रोग,
ब्लड सर्कुलेशन की समस्या,
माइग्रेन और सिरदर्द,
सूजन और गांठ,
सिस्ट और ट्यूमर जैसी स्थितियों में राहत।
हालांकि, यह थेरेपी मुख्य इलाज का विकल्प नहीं, बल्कि सहायक उपचार के रूप में देखी जाती है।
क्या जोंक थेरेपी से कैंसर ठीक हो सकता है?
इस सवाल को लेकर काफी भ्रम है। विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि जोंक थेरेपी कैंसर का इलाज नहीं है। अभी तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो कि इससे कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकता है। हां, कुछ मामलों में यह गांठ, दर्द या सूजन जैसी समस्याओं में राहत देने में मदद कर सकती है, लेकिन कैंसर के इलाज के लिए डॉक्टर द्वारा बताए गए मेडिकल ट्रीटमेंट को ही प्राथमिकता देनी चाहिए।
किन लोगों को जोंक थेरेपी नहीं करानी चाहिए?
अगर किसी व्यक्ति को खून की कमी (एनीमिया), ब्लीडिंग डिसऑर्डर, बहुत कमजोर इम्युनिटी या गंभीर संक्रमण है, तो जोंक थेरेपी नुकसानदायक हो सकती है। गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों में भी बिना डॉक्टर की सलाह इसे नहीं कराना चाहिए। हमेशा योग्य डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही यह थेरेपी करानी चाहिए।





