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ठानी पंचायत में विकास के नाम पर लाखों का घोटाला, बिना काम निकाले 20 लाख

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ठानी पंचायत में विकास के नाम पर लाखों का घोटाला, बिना काम निकाले 20 लाख

अधूरे काम और फर्जी भुगतान से ग्रामीणों में आक्रोश

आमला । जनपद की ग्राम पंचायत ठानी में भ्रष्टाचार का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और उपयंत्री की मिलीभगत से सरकारी राशि का गबन कर लिया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत में जिन कार्यों को कागजों में पूरा दिखाया गया है, वे धरातल पर आज तक शुरू भी नहीं हुए। ग्राम बुचनवाड़ी में नाली निर्माण के लिए 6 लाख 17 हजार रुपये स्वीकृत हुए थे, जिनमें से 3 लाख 88 हजार रुपये फरवरी 2025 में निकाल लिए गए। लेकिन 9 सितंबर 2025 तक नाली का काम शुरू नहीं हुआ। इसी तरह सोखता गड्ढे के लिए 77 हजार रुपये आहरित किए गए, लेकिन गांव में एक भी गड्ढा नहीं खोदा गया। आंगनवाड़ी भवन सुधार कार्य के नाम पर 1 लाख 39 हजार रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन इसमें घटिया सामग्री का उपयोग कर कम लागत में काम कराया गया और ज्यादा राशि निकाल ली गई। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह कई काम केवल कागजों पर ही पूरे दिखाए गए हैं, जबकि गांव में स्थिति जस की तस है।

स्ट्रीट लाइट मरम्मत, इवने ट्रेडर्स और फर्जी बिलों का खेल

ग्रामीणों ने कलेक्टर जनसुनवाई में जो दस्तावेज पेश किए, उनमें कई और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पंचायत ने फोटोकॉपी और प्रिंटआउट के नाम पर 170 रुपये प्रति कॉपी की दर से बिल पास कर राशि आहरित की, जो सीधे-सीधे फर्जीवाड़े की तरफ इशारा करता है। वहीं स्ट्रीट लाइट मरम्मत और रखरखाव के लिए सरपंच पुत्र राहुल गोहे के नाम पर 3 लाख रुपये का भुगतान किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि इस कार्य का कोई भी सबूत नहीं है और लाइटें आज भी खराब हालत में हैं। इसके अलावा पंचायत के मेट बलवंत इवने और उसके भाई सतीश इवने को वर्ष 2022 से 2025 तक करीब 20 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। वहीं ठानी से 15 किलोमीटर दूर स्थित “इवने ट्रेडर्स” नामक फर्म से लगभग 50 लाख रुपये का भुगतान दिखाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि आमला बाजार महज 5 किलोमीटर दूर है, जहां से सामान सस्ता और आसानी से उपलब्ध हो सकता था, लेकिन फर्जी भुगतान करने के लिए दूर की फर्म से बिल लगाए गए।

*मजदूरों के फर्जी नाम, नलजल योजना और डिजिटल सेंटर में भी गड़बड़ी*

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि मनरेगा के तहत मजदूरों के फर्जी नाम मस्टररोल में दर्ज कर राशि का भुगतान कर लिया गया। इन मजदूरों ने कभी भी किसी भी तरह का काम नहीं किया। वहीं नलजल योजना 2022-23 के तहत पाइपलाइन और ट्रांसफॉर्मर सहित सभी व्यवस्थाएं पूरी कर दी गई थीं, लेकिन आज तक पानी की सप्लाई शुरू नहीं हुई है। इससे गांव के लोग पानी के लिए परेशान हैं। डिजिटल सेंटर पॉइंट के नाम पर भी लाखों रुपये का फर्जी भुगतान दिखाया गया है। ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और उपयंत्री के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो और पंचायत में हुए सभी कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं गांव में कभी विकसित नहीं हो पाएंगी। शिकायत में रामाधार, मुकेश, कन्हैया, अनिल, बाबूलाल, दीपक, पप्पू, प्रदीप सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे और इस गड़बड़ी का विरोध दर्ज कराया।

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