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लखीमपुर खीरी: 17 साल पहले दामाद को जिंदा जलाने वाली सास को उम्रकैद

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उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में 17 साल पहले एक सास ने अपने ही दामाद को जिंदा जलाकर मार डाला था. अब जाकर कोर्ट ने उसे दोषी करार दिया. सास को कोर्ट मे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. साथ ही हजारों का जुर्माना भी लगाया है. सास की उम्र अब 80 साल हो चुकी है.

एडीजे देवेन्द्रनाथ सिंह ने दोषी सास को आजीवन कारावास समेत 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाते हुए जेल भेज दिया. एडीजीसी संजय सिंह ने बताया कि सुदामापुरी सीतापुर के रहने वाले अकील अहमद पीएसी सीतापुर में मुख्य आरक्षी थे.अकील अहमद की शादी सुन्दरवल गांव के एहतेशाम की पुत्री शाहीन उर्फ रिंकी के साथ हुई थी. अकील की पत्नी शाहीन और ससुराल वाले अकील पर अलग रहने का दबाव डाल रहे थे.

21 दिसम्बर 2007 की रात शाहीन अपने कमरे में आग ताप रही थी, तभी उसकी डेढ़ वर्ष की बेटी कंधे पर सवार हो गई, जिससे शाहीन आग में गिर गई और झुलस गई. शाहीन को अस्पताल में भर्ती कराया गया और उसके मायके वालों को सूचना दी गई. इलाज में अकील का काफी खर्च हुआ. इसके बाद 6 फरवरी 2008 को अकील की ससुराल वालों ने शाहीन की तबीयत खराब होने की सूचना देकर बहाने से लखीमपुर बुलाया और उसपर दहेज का सारा सामान सीतापुर से मंगवाने और तलाक देने का दबाव डालने लगे.

आग से जलाकर मार डाला
अकील ने फोन पर यह बात अपने भाई खलील को बताई. अकील की ससुराल वालों ने अकील को काफी मारा पीटा और आग से जलाकर हत्या कर डाली. रात करीब 12 बजे खलील को सीतापुर कोतवाली से सूचना मिली कि उसके भाई अकील को मार डाला है. सूचना पाकर लखीमपुर पहुंचे खलील को अकील का शव बाथरूम में क्षत विक्षत अवस्था में मिला. खलील ने अकील के ससुर एहतेशाम, सास निसार जहां पत्नी शाहीन, साला असलम समेत आठ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई.

ससुर-साले की हुई मौत
पुलिस ने विवेचना के बाद अकील के ससुर एहतेशाम, सास निसार जहां, साले असलम, असलम की पत्नी जेबा, नसरीन और जावेद के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया. मामले की सुनवाई के दौरान एहतेशाम और असलम की मौत हो गई. शेष आरोपियों के खिलाफ चली सुनवाई में अभियोजन ने मामले को साबित करने के लिए कई गवाहों को पेश किया. मामले की सुनवाई कर रहे एडीजे देवेन्द्रनाथ सिंह ने आरोपी सास निसार जहां और असलम को अकील की हत्या करने का दोषी पाया. असलम की पहले ही मौत हो जाने की वजह से आरोपी सास निसार जहां को सजा सुनाते हुए जेल भेज दिया. वहीं, अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया.

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