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इस साल गेहू की बुवाई में इन वैरायटी को बोये खेत में होगी बम्फर कमाई और मुनाफा इतना क्विंटल होगा गेहू।

इस साल गेहू की बुवाई में इन वैरायटी को बोये खेत

जानिए, गेहूं की इन नई किस्मों की विशेषताएं और फायदे
देश में खाद्यान्न का उत्पादन बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने कृषि में नए प्रयोग कर खाद्य उत्पादन बढ़ाने के लिए नई किस्में विकसित की हैं। इसी क्रम में पूर्व में जब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना के वैज्ञानिकों ने गेहूं की तीन किस्मों की पहचान कर उन्हें देश के लिए जारी किया है। बताया जा रहा है कि ये किस्में रोग प्रतिरोधी होने के साथ-साथ अधिक उपज देने में सक्षम हैं।


मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 29 अगस्त को उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की अध्यक्षता में राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर में किस्म पहचान समिति (वीआईसी) की बैठक हुई. इसमें देशभर के किसानों को गेहूं की तीन नई किस्में जारी की गईं। उम्मीद है कि आने वाले रबी सीजन में ये किस्में देश भर के किसानों को बुवाई के लिए उपलब्ध होंगी।

आज हम क ख़बरवाणी के माध्यम से किसानों को गेहूं की इन तीन नई किस्मों की विशेषताओं और लाभों के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

PBW-826 गेहूं की किस्म

  1. PBW-826 गेहूं की किस्म
    पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा चिन्हित और जारी की गई PBW-826 किस्म को देश के दो प्रमुख गेहूं बेल्टों के लिए उपयोगी बताया जाता है। यह किस्म पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान के कुछ हिस्सों, उत्तराखंड, जम्मू और हिमाचल प्रदेश सहित उत्तर पश्चिम के मैदानी इलाकों के लिए उपयोगी मानी जाती है। इन राज्यों में इस किस्म का उपयोग समय पर और सिंचित बुवाई के तहत किया जा सकता है। इन क्षेत्रों में तीन वर्षों के परीक्षण के दौरान अनाज की उपज के मामले में इस किस्म को पहला स्थान दिया गया है। यह किस्म उच्च हेक्टोलीटर भार वाले मोटे अनाज का उत्पादन करती है।

वहीं, यह किस्म पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे उत्तर पूर्व के मैदानी इलाकों के लिए भी उपयोगी पाई गई है। इस किस्म को सिंचित समय पर बुवाई के लिए बेहतर बताया जा रहा है।

  1. PBW 872 गेहूँ की किस्म
    यह किस्म पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा भी जारी की गई है। यह किस्म देश के उत्तर पश्चिम मैदानी क्षेत्र के किसानों के लिए जारी की गई है। इसका उपयोग सिंचित भूमि में किया जा सकता है। इस किस्म की पहचान जल्दी बोई जाने वाली और उच्च उपज क्षमता वाली किस्म के रूप में की गई है।
  2. PBW 833 गेहूं की किस्म
    पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने गेहूं की तीसरी किस्म पीबीडब्ल्यू 833 जारी की है। इस किस्म की पहचान उच्च अनाज उपज और प्रोटीन सामग्री के लिए की गई है। यह किस्म देश के उत्तर पूर्व के मैदानों में सिंचित भूमि के लिए जारी की गई है। यह देर से बोई जाने वाली किस्म है।

गेहूं की अन्य बेहतर उपज देने वाली किस्में
उपरोक्त किस्म के अलावा, गेहूं की कई किस्में हैं जो बेहतर उपज देती हैं। ये किस्में इस प्रकार हैं।

डीडीडब्ल्यू 47

डीडीडब्ल्यू 47
इस किस्म के गेहूं में प्रोटीन की मात्रा सबसे ज्यादा (12.69 फीसदी) होती है। इसे कीट और रोग प्रतिरोधी किस्म कहा जाता है। इसकी उत्पादन क्षमता 74 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।

करण वंदना


करण वंदना
इस किस्म को DBW-187 के नाम से भी जाना जाता है। गंगा तटीय क्षेत्रों के लिए गेहूं की यह किस्म अच्छी मानी जाती है। इसकी फसल लगभग 120 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है। इस किस्म की उत्पादन क्षमता लगभग 75 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इस किस्म में पीले रतुआ और ब्लास्ट जैसी बीमारियों का खतरा कम होता है।

पूसा सफल

पूसा सफल

गेहूं की इस किस्म को कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में खेती के लिए अच्छा माना जाता है। इसकी बुवाई 5 नवंबर से 25 नवंबर तक की जा सकती है। यह किस्म 57.5 से 79.60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज देती है। यह किस्म फफूंदी और सड़न के लिए प्रतिरोधी है।

करण श्रिया

करण श्रिया
यह किस्म उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के लिए उपयुक्त मानी जाती है। यह किस्म 127 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इस किस्म को केवल एक सिंचाई की आवश्यकता होती है। इसकी अधिकतम उत्पादन क्षमता 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।

करण नरेंद्र


इस किस्म की बुवाई 25 अक्टूबर से 25 नवंबर के बीच की जा सकती है। इसकी रोटी की गुणवत्ता अच्छी मानी जाती है। इसके लिए केवल 4 सिंचाई की आवश्यकता होती है। यह किस्म 143 दिनों में कटाई योग्य हो जाती है और प्रति हेक्टेयर 65.1 से 82.1 क्विंटल उपज देती है।

इस साल गेहू की बुवाई में इन वैरायटी को बोये खेत में होगी बम्फर कमाई और मुनाफा इतना क्विंटल होगा गेहू।