Iran-US: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच Pakistan ने बड़ा कूटनीतिक दांव खेला है। राजधानी Islamabad में दो दिन की अहम बैठक शुरू हो चुकी है। इस मीटिंग में Saudi Arabia, Turkey और Egypt के विदेश मंत्री शामिल हो रहे हैं। देसी अंदाज में कहें तो “बड़ा खेल शुरू हो चुका है”।
क्या है बैठक का असली एजेंडा?
इस मीटिंग का मकसद सिर्फ बातें करना नहीं, बल्कि जमीन पर असर दिखाने वाले फैसले लेना है। एजेंडा में Iran और United States के बीच भरोसा बढ़ाने, समुद्री रास्तों की सुरक्षा और पूरे इलाके में शांति बहाल करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। खासकर गाजा और लेबनान जैसे इलाकों पर भी चर्चा होगी।
शहबाज शरीफ की बड़ी कूटनीतिक चाल
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif इस पूरी पहल को लीड कर रहे हैं। उन्होंने शामिल देशों के साथ लगातार बातचीत की है ताकि सीजफायर का रास्ता निकाला जा सके। पाकिस्तान खुद को “मध्यस्थ” यानी ब्रिज के रूप में पेश कर रहा है—जो दोनों पक्षों को साथ बैठा सके।
पाकिस्तान के लिए क्यों अहम है ये मौका?
सच बात ये है कि पाकिस्तान इस वक्त आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। ऐसे में अगर ये मिशन सफल होता है, तो देश की इंटरनेशनल इमेज मजबूत होगी और आर्थिक फायदे भी मिल सकते हैं। देसी भाषा में समझें—“एक तीर से दो निशाने”।
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क्या सच में रुकेगा युद्ध?
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या ये कोशिश कामयाब होगी? दुनिया की नजरें इस बैठक पर टिकी हैं। अगर पाकिस्तान इस टकराव को कम करने में सफल रहता है, तो ये उसकी सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत होगी। लेकिन असली फैसला तो Iran और United States के भरोसे पर ही निर्भर करेगा।




