खबरवाणी
अन्नपूर्णा जी की प्रतिमा की हुई स्थापना
घर-घर घट हुए स्थापित
21 दिन तक मां अन्नपूर्णा का व्रत उपवास रख करेंगे पूजा अर्चना
आठनेर। प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी नगर के हिडली रोड स्थित दिलीप महाराज के निज निवास पर माता अन्नपूर्णा की प्रतिमा की स्थापना की गई है एवं घर-घर भी मां अन्नपूर्णा के घट स्थापित किए गए हैं 21 दिन तक चलने वाला यह व्रत माता बहने उपवास कर मां अन्नपूर्णा की कथा एवं पूजा अर्चना कर मनाएगी इस संबंध में श्रीमती सीमा सोनी ने बताया कि मां अन्नपूर्णा का उपवास ग्वारपाठा, तुलसी के वृक्ष,को पूजा स्थल पर रखकर एवं कथा का वाचन कर यह व्रत प्रारंभ होती है कथा वाचन के बाद ही आप कुछ भी जलपान कर सकते हैं इस कथा में एक गरीब ब्राह्मण धनंजय एवं सुलोचना का माता अन्नपूर्णा ने किस प्रकार कल्याण किया उसे विस्तार से बताया गया है। धनंजय एवं सुलोचना कासी में निवास कर थे एक दिन सुलोचना अपने पति से बोली स्वामी आप कुछ उधम करें तो काम बने धनंजय उसी दिन भगवान को खुश करने निकल पड़ा वह वह रस्ते में फल खाता जाता , झरने का पानी पिता जाता, इस प्रकार कितने दिन चलता गया । फिर उसे एक चांदी की चमकती वन की शोभा देखने में आई सुंदर सरोवर देखने में आया और कितनी ही अप्सराओं झुंड बनाए बैठी है एक कथा कहती बाकी सब माता अन्नपूर्णा अन्नपूर्णा इस प्रकार बार बार कहती थी कि आज अघन मास की उजियाली रात्रि थी आज से ही इस वृत का आरंभ था ,जिस शब्द की खोज को मै घर से निकला आज वहीं मुझे सुनने को मिला है धनंजय उन देवियों के पास जाकर पूछता है आप यह क्या करती है वे बोली हम माता अन्नपूर्णा का वृत करती है वृत करने के क्या होता हैं मुझे समझकर बताओ इस व्रत को करने से अंधों को नेत्र मिले, लूलो को पांव मिले, निर्धन के घर धन आवे, बांझ को संतान मिले,जो जिस कामना से वृत करता है माता उसकी इच्छा पूरी करती है धनंजय भी माता का व्रत करने तभी सरोवर में से 21 खंड की स्वर्ण सीडी हीरा मोती जड़ी हुई प्रगट हुई धनंजय उसमें अन्नपूर्णा माता कह कर उतर गया तो क्या देखता है करोड़ों प्रकाशमान माता अन्नपूर्णा जी का मंदिर है उसके स्वर्ण सियासन पर माता अन्नपूर्णा विराजमान है और सामने विछा हेतु भगवान शंकर खड़े हैं धनंजय दौड़ कर माता के चरणों में गिर पड़ा माता उसके मन का कलेश जान गई और बोली तूने मेरा व्रत किया है जा संसार तेरा सतकार करेगा, माता रानी की कृपा से उसके घर में अटूट संपति उमड़ने लगी छोटा सा घर बहुत बड़ा गिना जाने लगा अनेक आगे सम्बन्धी आकर उनकी बडाई करने लगे धनंजय ने माता अन्नपूर्णा का बहुत सुंदर मंदिर बनवाया जिसमें धूम धाम से माता जी पधारी माता अन्नपूर्णा ने जैसे भंडार धनंजय और सुलोचना के भरे हैं वैसे सब के भरे । इस व्रत को इसीलिए सभी माता बहने करती है और अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर माता अन्नपूर्णा की मन्नत पूरी करती है





