India-EU Trade Deal: भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच हुआ अब तक का सबसे बड़ा ट्रेड डील सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान के लिए भी सिरदर्द बन गया है। इस समझौते के बाद भारतीय उत्पादों, खासकर टेक्सटाइल, को यूरोप के बाजारों में सीधी और सस्ती एंट्री मिल जाएगी। यही वो बाजार है जहां अब तक पाकिस्तान की पकड़ मजबूत मानी जाती थी।
पाकिस्तान के लिए क्यों अहम है EU बाजार
यूरोपीय यूनियन पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। पाकिस्तान हर साल यहां करीब 8.25 लाख करोड़ रुपये का कारोबार करता है, जिसमें टेक्सटाइल सेक्टर की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। भारत-EU डील के ऐलान के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने ब्रसेल्स से संपर्क तेज कर दिया है। डिप्टी पीएम इशाक डार ने आपात बैठक बुलाई, वहीं पीएम शहबाज शरीफ ने भी EU राजदूत से मुलाकात की।
GSP+ खत्म होने का डर
पाकिस्तान को साल 2014 में EU की तरफ से GSP+ स्टेटस मिला था, जिसके तहत उसके 66% निर्यात पर कोई ड्यूटी नहीं लगती। इसी वजह से पाकिस्तान के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में 108% तक उछाल आया। लेकिन ये स्टेटस 2027 में खत्म हो रहा है। अगर इसे आगे नहीं बढ़ाया गया, तो पाकिस्तान की हालत और खराब हो सकती है।
भारत को मिला जीरो टैरिफ का फायदा
अब तक भारत को यूरोप में अपने उत्पादों पर 12% तक टैरिफ देना पड़ता था। लेकिन नए समझौते के बाद भारत को जीरो या बेहद कम टैरिफ का फायदा मिलेगा। डील के मुताबिक, अगले 7 साल में EU भारत से आने वाले सामान पर 99% तक टैरिफ खत्म या कम करेगा। इससे टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, फुटवियर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को जबरदस्त बढ़त मिलेगी।
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पाकिस्तान में लाखों नौकरियों पर खतरा
EU से मिलने वाला ड्यूटी-फ्री फायदा खत्म होने की सूरत में पाकिस्तान के करीब 1 करोड़ रोजगार खतरे में पड़ सकते हैं। अकेले टेक्सटाइल सेक्टर में 1.5 से 2.5 करोड़ लोग काम करते हैं। भारत-EU डील ने पाकिस्तान की पहले से डगमगाती अर्थव्यवस्था पर नई चोट कर दी है।





