खबरवाणी
मौत बांट रहे अवैध झोलाछाप, स्वास्थ्य विभाग मौन क्यों?
रिपोर्ट प्रदीप यादव भीमपुर
भीमपुर विकासखंड: चिखली, रातामाटी, धामनिया व चोहटा में फर्जी क्लिनिकों का बोलबाला, ग्रामीणों की जान पर बन आई बैतूल जिले के भीमपुर विकासखंड में मधुमक्खियों की तरह फैल चुके अवैध झोलाछाप डॉक्टर ग्रामीणों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। ग्राम चिखली, रातामाटी, धामनिया और चोहटा जैसे गांवों में ये फर्जी चिकित्सक घर-घर दवाखाने चला रहे हैं। खुद को एमबीबीएस डॉक्टर बताने वाले ये लोग बिना किसी वैध डिग्री के इलाज कर रहे हैं। बड़ी घटना होने पर ही स्वास्थ्य विभाग जागता है, लेकिन समय रहते जांच न होने से मरीजों की जान पर बन रही है।स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इन झोलाछापों के पास न तो कोई मान्यता प्राप्त डिग्री है और न ही डिप्लोमा। फिर भी वे खुलेआम घूम-घूम कर दवाइयां बांट रहे हैं। भीमपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले सभी गांवों में होम मेडिकल स्टोर और अवैध क्लिनिकों की भरमार हो गई है। भोले-भाले ग्रामीण इन्हें असली डॉक्टर समझकर इलाज करवा रहे हैं, जो मौत को न्योता दे रहा है।
प्रशासन की चुप्पी से सवाल उठ रहे हैं —
क्या झोलाछापों को खुली छूट मिल रही है? पिछले ऐसी कई घटना है फिर भी जिला प्रशासन की आंखें नहीं खुल रही, फिर भी सबक नहीं
पिछले वर्ष भीमपुर क्षेत्र में इसी तरह के एक मामले में एक मरीज की मौत हो चुकी थी। गलत इलाज के कारण ग्रामीण ने जान गंवाई, लेकिन उसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब फिर वही कहानी दोहराई जा सकती है जानकारों का कहना है कि झोलाछाप डॉक्टरों पर विकासखंड बीएमओ का संरक्षण हो सकता खैर ये जांच का विषय है, वरना आज तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? “वही ग्रामीण जुगराज ने कहा हम गरीब हैं, असली डॉक्टर के पास जाने का खर्च नहीं उठा पाते। ये झोलाछाप सस्ते में इलाज का लालच देते हैं, लेकिन जान जोखिम में डाल देते हैं,” ।
बीएमओ दीपक निगवाल का कहना
एसडीएम-तहसीलदार से समय लेकर करेंगे कार्रवाई
विकासखंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) दीपक निगवाल से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा, “हम समय निकालकर जांच करेंगे। एसडीएम और तहसीलदार से समय लेकर इन अवैध क्लिनिकों पर सख्त कार्रवाई जरूर करेंगे।” लेकिन ग्रामीणों को यह वादा खोखला लग रहा है। वे पूछ रहे हैं—कितने समय का इंतजार कराएं? क्या किसी की मौत का इंतजार है?स्थानीय प्रशासन की उदासीनता, जिम्मेदारी कौन लेगा?
भीमपुर विकासखंड में एक तरफ से जांच शुरू की जाए तो दर्जनों अवैध दवाखाने और क्लिनिक मिल जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हैं, जबकि आम जनता की जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है। जागरूक नागरिकों का कहना है कि प्रशासन ने चुप्पी साध ली है। अगर समय रहते छापेमारी की जाए तो ऐसी घटनाओं पर अंकुश लग सकता है।यह मामला न केवल भीमपुर तक सीमित है, बल्कि पूरे जिले में झोलाछाप डॉक्टरों की समस्या बढ़ रही है। ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा सुविधाओं की कमी का फायदा उठाकर ये ‘मौत के सौदागर’ सक्रिय हैं। स्वास्थ्य विभाग को तत्काल जांच टीम गठित करनी चाहिए ताकि निर्दोष ग्रामीणों की जान बचाई जा सके। प्रशासन से मांग है—झोलाछापों पर तुरंत कार्रवाई करें, वरना बड़ी त्रासदी का इंतजार न करें






